चित्तौड़गढ। 13 जनवरी से 26 फरवरी तक प्रयाग (यूपी) में महाकुंभ मेला भरेगा। अनुमान लगाया जा रहा है कि 12 साल बाद होने वाले इस आयोजन में 100 देशों से 45 करोड़ से ज्यादा श्रद्धालु पहुंचेंगे। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने महाकुंभ को कचरा मुक्त (प्लास्टिक-फ्री) बनाने को लेकर मुहिम चलाई है। इसलिए लिए देशभर से स्टील की थालियां और कपड़े के थैले इकट्ठे किए जा रहे हैं।
आरएसस की पर्यावरण संरक्षण गतिविधि संस्थान की टीम ने चित्तौड़ प्रांत के आठ विभागों से एक लाख 12 हजार थालियां और थैले जुटाने का टारगेट दिया है। ये थालियां और थैले महाकुंभ में लंगर चलने वाले अखाड़े और संस्थाओं को भेजे जाएंगे। चित्तौड़गढ़ जिले में यह अभियान देरी से शुरू हुआ था। पांच दिन में संस्थान ने जिले से 3000 से ज्यादा थालियां-थैले जुटा लिए हैं।
4 हजार टन से ज्यादा का कचरा होने का अनुमान
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पर्यावरण संरक्षण गतिविधि संस्थान से चित्तौड़ के प्रांत के सहसंयोजक धर्मपाल गोयल ने बताया कि 13 जनवरी से प्रयागराज में महाकुंभ का आयोजन होने वाला है। हमारे कार्यकर्ता 12 जनवरी को ही प्रयागराज पहुंच जाएंगे। इस महाकुंभ में 100 देशों से 45 करोड लोगों की आने की संभावना है।
अनुमान लगाया जा रहा है कि अगर डिस्पोजल यूज किया जाए तो 4 हजार टन से ज्यादा का कचरा प्रतिदिन होगा। इसीलिए इस बार संघ ने महाकुंभ स्वच्छ और हरित बनाने के लिए अपना योगदान देने का फैसला किया है।
लोगों से अपील - साथ भी लेकर जाए थालियां और थैले
उन्होंने बताया कि इसके लिए हम देश भर से घर घर जाकर थालियां और थैले लेंगे। इन थालियां और थैलों को एकत्रित कर दिसंबर महीने के दूसरे हफ्ते में मेले में लंगर चलने वाले अखाड़े और संस्थाओं को भेजा जाएगा।
उन्होंने कहा कि जो खुद महाकुंभ में भाग लेने जा रहे हैं, उनसे अपील की जारी है कि आप अपने साथ एक थाली और एक थैला लेकर जाए। जो नहीं जा रहे हैं वह अपना सहयोग हमें करें। अगर कोई व्यक्ति खुद एक थाली और एक थैला खरीद के नहीं दे सकता है तो 100 रुपए नकद भी दे सकते हैं। एक स्टील की थाली की कीमत 75 रुपए और कपड़े के थैले की कीमत 25 रुपए लगाई गई है।
हिंदू संस्कृति के मान मूल्य से हो युवाओं का जुड़ाव
उन्होंने बताया- हमारा उद्देश्य यही है कि महाकुंभ के मेले के दौरान वहां का स्थान, नदियां सब स्वच्छ हो। हम चाहते तो अपनी और से भी यह काम कर सकते थे लेकिन आज की युवाओं का हिंदू संस्कृति के मान मूल्य के साथ जुड़ाव हो, इसके लिए घर-घर से थाली और थैला लिया जा रहा है।
अयोध्या में राम मंदिर को लेकर भी यह अभियान किया गया था जिससे लोगों का जुड़ाव भी हुआ। उन्होंने बताया कि दक्षिणी राजस्थान के तीन प्रांतों से पांच लाख थालियां और थैले लिए जाने का लक्ष्य है। चित्तौड़गढ़ प्रांत में आठ विभाग बांसवाड़ा, राजसमंद, उदयपुर, चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा, कोटा, बारां, अजमेर आते है। चित्तौड़गढ़ प्रांत से एक लाख 12 हजार थैले और थालियां एकत्रित की जाएगी।
50 प्रतिशत कम हो सकता है कचरा
सहसंयोजक धर्मपाल गोयल ने बताया कि 15-15 लोगों की अलग-अलग टोलियां बनाई गई है। यह टोलियां घर-घर जाकर सभी थाली और थैली एकत्रित करेंगे। चित्तौड़गढ़ जिले से अभी तक 3000 और चित्तौड़गढ़ प्रांत से 10 हजार थालियां और थैले जुट चुके हैं।
उम्मीद की जारी है कि इस कारण महाकुंभ में इस बार 50 प्रतिशत से भी ज्यादा कचरा कम कर पाएंगे। लोगों को हम पर्यावरण के प्रति जागरूक भी करना चाहते हैं। पिछले महाकुंभ में हमने हरिद्वार के घाटों को गोद लिया था। घाटों की साफ सफाई और थैले बांटने का काम हमने उस पर भी किया था।
लेकिन यह देखने में आया कि खाने में डिस्पोजल यूज करने के कारण ज्यादा गंदगी हुई थी। इसलिए इस बार हमने थालियां भी देने का फैसला किया।