BREAKING NEWS
KHABAR : एक पेड़ मां के नाम अभियान के तहत कलेक्टर.. <<     KHABAR : नारकोटिक्स नियंत्रण के लिए सभी विभाग.. <<     MANDI BHAV : एक क्लिक में पढ़े कृषि उपज मंडी मन्दसौर.. <<     KHABAR : जुलाई माह की इस तारीख तक मिलेगा स्नातक और.. <<     BIG REPORT : पदोन्नति के साथ बढ़ी जिम्मेदारी, एसपी.. <<     KHABAR : डायरिया पर वार- पीएचई का विशेष अभियान,.. <<     BIG REPORT : राजस्व अमले की त्वरित कार्रवाई से.. <<     KHABAR : नशे से दूरी है जरूरी अभियान का आगाज, मनासा.. <<     REPORT : 109 ग्राम पंचायतों के सरपंचों की कार्यशाला.. <<     KHABAR : कसरावद में नशे से दूरी है जरूरी 2.0 अभियान.. <<     KHABAR : मप्र श्रमजीवी पत्रकार संघ की प्रदेश.. <<     NMH MANDI : एक क्लिक में पढ़े कृषि उपज मंडी नीमच के.. <<     KHABAR : वैश्विक निविदाओं से हवाई किराया घटाने और.. <<     BIG NEWS : उज्जैन में देश की पहली हाईटेक आंगनबाड़ी.. <<     KHABAR : ओटले हटाने पहुंचा नगर पालिका अमला,.. <<    
वॉइस ऑफ़ एमपी न्यूज़ चैनल में विज्ञापन के लिए..
November 19, 2024, 12:01 pm
BIG NEWS : मप्र ने इस साल अब तक 38 बाघों को खोया, सबसे अधिक 12 बांधवगढ़ में, लगभग 40 प्रतिशत की मौत टाइगर रिजर्व से बाहर, 12 साल में 355 बाघ मरे, पढे़ खबर 

Share On:-

भोपाल। मप्र में साल 2024 में अब तक 38 बाघों की मौत अलग-अलग कारणों से हुई है। इनमें से सबसे अधिक 12 बाघ बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में मरे हैं। प्रदेश में इस साल मरे बाघों में से लगभग 40 प्रतिशत (15) सुरक्षित इलाकों यानि टाइगर रिजर्व के बाहर जाकर मौत के शिकार हुए हैं। दुर्घटनाओं और करंट लगने से भी लगातार बाघों की मौत हुई है।


मप्र कई सालों से लगातार बाघों की मौत के मामले में देश भर में अव्वल बना हुआ है। नेशनल टाइगर कंजर्वेशन ऑथोरिटी (एनटीसीए) के आंकड़ों के मुताबिक मप्र में 2012 से 2024 के बीच 355 बाघों की मौत दर्ज हुई। इसी अवधि में महाराष्ट्र में 261, कर्नाटक में 179 और उत्तराखंड में 132 बाघों की मौत रिकॉर्ड में दर्ज हुई है।


तीनों ही राज्य बाघों की संख्या के मामले में शीर्ष 5 राज्यों में शामिल हैं। 2023 में जारी आंकड़ों के मुताबिक मप्र में 785, कर्नाटक में 563 तो उत्तराखंड में 560 और महाराष्ट्र में 444 बाघ दर्ज हुए थे। 2024 की बाघों की मौत के आंकड़ों के मुताबिक मप्र में 37, महाराष्ट्र में 19, कर्नाटक में 11 तो उत्तराखंड में 9 बाघों की मौत ही दर्ज हुई है।


करंट लगने, दुर्घटना और टेरिटोरियल फाइट बड़ी वजहें
कई सालों से मप्र में वन्य प्राणी संरक्षण के क्षेत्र में काम कर रहे एक कार्यकर्ता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि शिकार पूरी तरह बंद हो जाने की बात कही जा रही है पर ऐसा सच में होना संभव नहीं लगता। कोर एरिया में बाघ काफी हद तक सुरक्षित रहते हैं पर कई बार बफर क्षेत्र में जाने पर छोटे जानवरों के लिए लगाए इलेक्ट्रिक ट्रैप या जहर के शिकार हो जाते हैं।


बांधवगढ़ में अब 160 से अधिक बाघ हैं, इसी तरह पेंच और कान्हा में भी बाघों कि बढ़ती संख्या के बीच टेरिटरी बनाने या शिकार के लिए बाघ सुरक्षित क्षेत्रों से बाहर निकल जाते हैं और दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं। इस मामले में चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन वीएन अम्बाड़े ने सोमवार को बाघों से जुड़े अपराधों में आसानी से जमानत नहीं मिले, ऐसे निर्देश अमले को दिए।


एसआईटी ने कहा - मौत की जांच में लापरवाही बरती
2021 से 2023 के बीच बांधवगढ़ में 34 तो शहडोल वनमंडल में 9 बाघ मरे थे। वन विभाग के जांच के लिए एसआईटी बनाई थी। एसआईटी ने मई में एसआईटी ने रिपोर्ट दी थी, रिपोर्ट में था कि 10 बाघों की मौत के मामलों में लापरवाही बरती गई थी। मृत बाघ के अंग जब्त करने और आरोपियों को पकड़ने में भी उदासीनता दिखी। कई मामलों में प्रिलिमिनरी ऑफेंस रिपोर्ट भी दर्ज नहीं हुई थी। करंट के मामलों में पूरे सबूत नहीं इकट्ठा किए गए।


निमोनिया से शावक की मौत होने की आशंका
जबलपुरद्य सिवनी के पेंच टाइगर रिजर्व नेशनल पार्क में रविवार को मृत हालत में मिले नर बाघ के शावक का शव सोमवार को वेटरनरी विवि के स्कूल ऑफ वाइल्ड लाइफ फॉरेंसिक एंड हेल्थ सेंटर लाया गया। यहां टीम ने बाघ के शव का पोस्टमार्टम व परीक्षण किया। शावक करीब 4 माह का था। परीक्षण के दौरान शावक के सभी अंग सुरक्षित पाए गए हैं। वेटरनरी डॉक्टरों का कहना है कि ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि शावक की मृत्यु फेफड़ों में संक्रमण (निमोनिया) के कारण हुई है।

VOICE OF MP
एडिटर की चुनी हुई ख़बरें आपके लिए
SUBSCRIBE