चित्तौड़गढ़। डूंगला उपखण्ड क्षेत्र के एक बुजुर्ग अफीम किसान का पट्टा किसी अन्य व्यक्ति के नाम बहाल कर दिया गया। इस मामले में सांसद सीपी जोशी ने एक्शन लिया है। सांसद ने फाइल को होल्ड करवा दिया है।
इस मामले ने सांसद जोशी ने जांच पड़ताल करने के निर्देश दिए। इस दौरान सांसद जोशी ने सेकेंड डिवीजन के अधिकारियों पर नाराजगी भी जताई। नारकोटिक्स ऑफिस पहुंचने के बाद उन्होंने सभी फाइल देखी। हालांकि मामले का कोई हल नहीं निकला इसलिए पट्टा अभी दोनों पक्षों को न दिए जाने का फैसला लिया गया।
शनिवार सुबह सांसद सीपी जोशी अपने आवास के बाहर ही लोगों की समस्याएं सुन रहे थे। इस दौरान डूंगला उपखंड के सेठवाना गांव के बुजुर्ग पीड़ित किसान नारायण पुत्र देवा के बेटों ने सांसद सीपी जोशी के सामने पेश होकर अपनी पीड़ा सुनाई।
इस पर सांसद सीपी जोशी तुरंत एक्शन लेते हुए अन्य जनप्रतिनिधियों जिला प्रमुख भूपेंद्र सिंह बाडोली, सुधीर जैन, रघु शर्मा और किसानों के साथ केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो कार्यालय पहुंचे। अचानक से सांसद सीपी जोशी को देख नारकोटिक्स विभाग कार्यालय परिसर में अधिकारियों और कर्मचारियों में हड़कंप मच गया।
जिला अफीम के तीनों खण्डों के अधिकारी और कर्मचारी इधर उधर दौड़ लगाते नजर आए। सीपी जोशी की गाड़ी सीधे जिला अफीम अधिकारी कार्यालय द्वितीय खण्ड के सामने जाकर रुका।
अफीम किसान के प्रति दिखाई संवेदनशीलता
जन सुनवाई के तुरंत बाद सांसद सीपी जोशी को अर्जेंट मीटिंग में शामिल होने प्रतापगढ़ जाना था। लेकिन अफीम किसान और केंद्र से जुड़ा संवेदनशील मामला होने की वजह से सीपी जोशी सभी काम छोड़कर सबसे पहले नारकोटिक्स ब्यूरो ऑफिस पहुंचे।
आमतौर पर अधिकांश समय शांत और सौम्य स्वभाव में नजर आने वाले सांसद सीपी जोशी नारकोटिक्स कार्यालय पहुंचने के बाद नाराज दिखे। इस दौरान अफीम अधिकारी हिमांशु शक्तावत अकेले ही ऑफिस में मौजूद थे। जिन्हें सीपी जोशी ने ऑनलाइन रिकॉर्ड दिखाने को कहा। लेकिन वे जिला अफीम अधिकारी अमर सिंह के आने का हवाला देकर ऑनलाइन रिकॉर्ड दिखाने से बचते रहे।
एक घंटे सीबीएन कार्यालय में रुके सांसद
सांसद जोशी बार-बार अधिकारी को ऑनलाइन रिकॉर्ड दिखाने को कहते रहे। जबकि अधिकारी हिमांशु शक्तावत मामले में टालमटोल करते रहे। उनका कहना था कि मामले को लेकर इन्वेस्टिगेशन करने के बाद तैयार की गई ऑफलाइन डॉक्यूमेंट्स की फाइल जिला अफीम अधिकारी की कस्टडी में है।
करीब 15 मिनट बाद जिला अफीम अधिकारी अमर सिंह नारकोटिक्स ब्यूरो ऑफिस पहुंचे। जिसके बाद पीड़ित किसानों और अधिकारियों को लेकर एक घंटे तक जिला अफीम अधिकारी के केबिन में बैठकर सांसद सीपी जोशी ने मामले से जुड़े सभी डॉक्यूमेंट्स की गहनता से पड़ताल की और कड़े अंदाज में गड़बड़ी सुधारने के निर्देश दिए। उन्होंने फिलहाल यह फाइल होल्ड करने की बात कही। ऑफिस में इस दौरान एक घण्टे से ज्यादा समय तक सीपी जोशी नारकोटिक्स ब्यूरो कार्यालय में रुके रहे।
गड़बड़ी का अंदेशा होने पर सांसद ने जताई नाराजगी
बता दें कि भारत सरकार की नई अफीम नीति 2024-25 में अफीम किसानों के साल 1994-95 से खारिज अफीम पट्टों को बहाल किया जा रहा है। चित्तौड़गढ़ जिला अफीम कार्यालय के द्वितीय खंड में अंतर्गत आने वाले डूंगला उपखण्ड के सेठवाना गांव के अफीम किसानों के बहाल किए जाने वाले पट्टों की सूची जारी की गई।
इस सूची में सेठवाना गांव के नारायण पुत्र देवा के नाम शामिल था। लेकिन नारकोटिक्स विभाग के अधिकारियों की ओर से नारायण पिता देवा को मृत बता कर ये पट्टा सेठवाना गांव के ही मृतक नारायण पिता रोड़ा की पत्नी भूरी को आवंटित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी।
नारकोटिक्स अधिकारियों का दावा था कि ये पट्टा मृतक नारायण पिता रोड़ा का ही है। मृतक नारायण के पिता का नाम की जगह गलती से दादा का जुड़ गया था। यह बरसों पहले विभाग द्वारा ही गलती की गई थी।
पिछले तीन दशक से ज्यादा समय से ये नाम गलत ही चला आ रहा है। जबकि नामांतर की प्रक्रिया के दौरान पहले नाम सुधार करना चाहिए था। इस पर अधिकारियों का कहना है कि 23 तारीख पट्टा बहाली का आखरी तारीख है और किसानों की लिस्ट लम्बी है। इसलिए इस ओर ध्यान नहीं दिया गया। इस पर सांसद सीपी जोशी ने सवाल किया कि इतने सालों से अगर गलत नाम चला आ रहा था तो इसे पूर्व में संशोधित क्यों नहीं किया गया। इस सवाल के उत्तर में दोनों अधिकारियों से ठोस प्रमाणिक जवाब देते नहीं बन सका।
उन्होंने यह भी जानकारी ली कि पट्टा किस नाम से जारी किया गया था, इस पर अधिकारी ने नारायण पुत्र देवा का ही नाम बताया। इस पर सांसद जोशी ने मामले में गड़बड़ी का अंदेशा जताया और कहा कि जिस व्यक्ति के नाम से पट्टा जारी किया गया है। उसे ही ये पट्टा मिलना चाहिए।
सांसद ने पट्टा रोकने के दिए आदेश
पीड़ित किसान के बेटों की मौजूदगी में सांसद सीपी जोशी ने जिला अफीम अधिकारी, अफीम अधिकारी हिमांशु शक्तावत से मामले को लेकर सवाल पूछे और तमाम डॉक्यूमेंट्स की गहनता से जांच की। डॉक्यूमेंट्स की जांच और लंबी चर्चा के बावजूद दोनों अधिकारी गड़बड़ी को लेकर सांसद को संतुष्टि भरा जवाब नहीं दे सके। ऐसे में जब तक मामले की जांच पूरी होने तक सांसद ने अधिकारियों को पूरी गहनता के साथ जांच करने के बाद ही पट्टा दिए जाने के निर्देश दिया, तब तक इस फाइल को होल्ड करने की बात कही।
आवेदन पत्र में साफ दिख रही गड़बड़ियां
नारकोटिक्स विभाग के अधिकारियों की ओर से सेठवाना के रहने वाले नारायण पिता देवा के नाम से बहाल होने वाले पट्टे को नारायण पिता रोड़ा की पत्नी भूरी के नाम आवंटन की प्रक्रिया की जा रही है। साल 1995 में खारिज होने वाले अफीम किसान का नाम आवेदन पत्र में लाल घेरे में नारायण पुत्र देवा लिखकर उसे मृतक बताया गया है।
जबकि नारायण पुत्र देवा जीवित है और उनकी ओर से ये पट्टा उन्हीं का होने का दावा किया जा रहा है। वहीं, दूसरे काश्तकार जिसको विभाग द्वारा पट्टे का असली मालिक माना जा रहा है, उनके पास भी मिले डॉक्यूमेंट्स में नारायण पुत्र देवा का ही नाम है।
जबकि मृत्यु प्रमाण पत्र नारायण पुत्र रोड़ा का बना हुआ है। वहीं, डॉक्यूमेंट्स में पिछले तीस साल से ज्यादा समय के पुराने अफीम पट्टों की प्रतिलिपि में नारायण पिता देवा का नाम अंकित है। जबकि राशनकार्ड, बिजली के बिल सहित अटैच किए हुए अन्य डॉक्यूमेंट्स मृतक नारायण पुत्र रोड़ा के नाम से लगाए गए है। जिसकी पत्नी भूरी के नाम से अफीम पट्टा बहाल करने की प्रक्रिया की जा रही थी। भूरी बाई के पक्षकार ने बताया कि उनके दादाजी का नाम भी देवा है, इसलिए गलती से पिता की जगह दादा का नाम जुड़ गया था।
गड़बड़ी की आशंका, बुजुर्ग किसान को धमकाया
सरकार की ओर से बहाली सूची जारी की गई। जिसके बाद सेठवाना निवासी नारायण पुत्र देवा अपने दो बेटों के साथ पट्टे का दावा करने चित्तौड़गढ़ नाटकोटिक्स ब्यूरो ऑफिस पहुंचे थे। बुजुर्ग किसान के बेटों का कहना है कि अफीम अधिकारियों ने पिता और बेटों को केबिन में बुलाकर एनडीपीएस एक्ट में फंसाने की धमकी दी।
घर जाने के बाद मुखिया को घर भेजकर धमकाया। इससे आहत होकर बुजुर्ग किसान नारायण सुथार की तबीयत खराब हो गई। अब सांसद सीपी जोशी की ओर से मामले में हस्तक्षेप करने के बाद पट्टा पर अपना अधिकार होने का दावा करने वाले पीड़ित किसान के परिवार ने अपना पट्टा फिर से बहाल होने की उम्मीद जताते हुए राहत की सांस ली है।