भोपाल। विजयपुर विधानसभा उपचुनाव में हार का सामना करने वाले वन मंत्री राम निवास रावत का इस्तीफा मंजूर हो गया है। मप्र के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विदेश दौरे से लौटने के बाद 2 दिसंबर को रावत के इस्तीफे को अनुशंसा के लिए राज्यपाल मंगू भाई पटेल के पास भेजा था।
बुधवार देर शाम राजभवन से इस्तीफे पर अनुशंसा कर मंजूरी की प्रक्रिया पूरी कर ली गई। रावत का इस्तीफा मंजूर होते ही अब नए वन मंत्री की तलाश शुरू हो गई है। इस पद के लिए पूर्व वन मंत्री नागर सिंह चौहान और विजय शाह की दावेदारी सबसे मजबूत मानी जा रही है।
वन्य प्राणियों से जुड़े इस महकमे को पाने के लिए दूसरे मंत्री भी तैयार हैं। रावत कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए और वन मंत्री रहते हुए चुनाव लड़े थे। सूत्रों की माने तो ऐसे में सरकार उन्हें जल्द ही किसी नए पद की जिम्मेदारी दे सकती है।
दो दिसम्बर से मंजूर हुआ इस्तीफा,चार को नोटिफिकेशन
रावत का इस्तीफा दो दिसम्बर को मंजूर किया गया। जिसका नोटिफिकेशन सामान्य प्रशासन विभाग ने 4 दिसम्बर को जारी किया है। सीएम डॉ मोहन यादव के जर्मनी और यूके से 30 नवम्बर को भोपाल लौटने के बाद वन मंत्री रावत ने उनसे मुलाकात की थी। माना जा रहा है कि सीएम से मुलाकात के बाद ही इस्तीफे को स्वीकार करने पर अंतिम फैसला हुआ है। सीएम यादव की अनुशंसा के बाद इस्तीफा राजभवन को भेजा गया है
23 नवम्बर को रिजल्ट आने के बाद रावत ने की थी इस्तीफे की घोषणा
वनमंत्री रावत ने 23 नवम्बर को विजयपुर विधानसभा चुनाव के परिणाम घोषित होने के बाद उसी शाम मंत्री पद से इस्तीफे की घोषणा कर दी थी। लेकिन तब से यह पेंडिंग था। मुख्यमंत्री 24 नवम्बर को विदेश के लिए रवाना हो गए और तीस नवम्बर को भोपाल लौटे। इसके बाद रावत की उनसे मुलाकात हुई और अब इस्तीफे को मंजूरी मिली है।
वन मंत्री बनने के सवाल पर मुस्कुरा कर रह गए थे शाह
रावत का इस्तीफा मंजूर होने के बाद अब इस विभाग के लिए नए मंत्री की तलाश शुरू हो गई है। वन मंत्री रह चुके कुंवर विजय शाह और नागर सिंह चौहान सबसे प्रबल दावेदार हैं। दो दिन पहले शाह का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आया था। इसमें जब शाह से पूछा गया था कि रावत के इस्तीफे के बाद वन मंत्री का पद खाली है, क्या वे वन मंत्री बन सकते हैं। इस पर शाह बिना कोई जवाब दिए मुस्कुरा कर चल दिए थे।
दूसरी ओर रावत को वन मंत्री बनाए जाने से पहले यह महकमा मंत्री नागर सिंह चौहान के पास था। उनसे वन विभाग छीने जाने पर चौहान ने नाराजगी भी जताई थी और बात दिल्ली तक पहुंची थी। ऐसे में उनकी भी दावेदारी इस पद के लिए मानी जा रही है। इनके अलावा मोहन कैबिनेट में कमजोर विभाग वाले मंत्रियों की निगाहे भी इस विभाग पर हैं। हालांकि इसका अंतिम फैसला मुख्यमंत्री को ही करना है।
सीएम के पास हैं ये महत्वपूर्ण विभाग
मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने भी अपने पास कई महत्वपूर्ण विभाग रखे हैं। इसमें सामान्य प्रशासन विभाग के अलावा गृह, जेल विभाग, औद्योगिक नीति और निवेश प्रोत्साहन, जनसंपर्क, नर्मदा घाटी विकास विभाग, विमानन, खनिज साधन, लोक सेवा प्रबंधन, प्रवासी भारतीय विभाग शामिल हैं। विभागों के नए बंटवारे में सीएम अपने पास से भी कुछ विभाग दूसरे मंत्रियों को दे सकते हैं।