इंदौर। जैन समाज के लिए गौरवपूर्ण क्षण में जैन मुनि की आचार्य पदवी समारोह में देशभर से श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। शुक्रवार को तीन दिवसीय महोत्सव का मुख्य उत्सव रहा, जिसमें बंधु बेलड़ी जिन हेमचंद्रसागर सूरिजी महाराज के सान्निध्य एवं 150 से अधिक साधु-साध्वी भगवंतों की मौजूदगी में जयकारों के बीच पद्मचंद्र सागरजी एवं आनंदचंद्र सागरजी आचार्य पद से सुशोभित हुए।
समारोह में 15 राज्यों से पधारे श्रावक-श्राविकाओं की संख्या इतनी अधिक थी कि पंडाल की क्षमता कम पड़ गई। इस दौरान शहर के 150 जिनालयों के श्रीसंघों के प्रतिनिधि, पदाधिकारी के साथ ही जनप्रतिनिधि भी उपस्थित थे। व्यवस्थाओं को देखते हुए आयोजकों ने पंडाल के बाहर एलईडी स्क्रीन की व्यवस्था की, जिससे बाहर खड़े श्रद्धालु भी इस पावन अवसर के साक्षी बन सके।
इसके पहले दलालबाग में आचार्यश्री की पदवी महोत्सव के दूसरे दिन गुरुवार को हजारों समाज बंधु पहुंचे और गुरुवर की वंदना कर आशीर्वाद लिया। इस दौरान करीब 1000 युवाओं ने नो निंदा मूवमेंट की शपथ ली। इसके साथ ही 36 महिला मंडल के ग्रुपों ने महाचौबिसी महागान का आयोजन किया। इसमें सभी महिलाओं ने ग्रुप में विशेष प्रस्तुतियां दीं। बहुमान भी किया गया।
समारोह के दौरान परंपरागत रीति-रिवाजों का पालन किया गया और श्रद्धालुओं ने बड़े उत्साह के साथ बोलियां भी लगाईं। यह आयोजन जैन समाज की आस्था और एकजुटता का प्रतीक बन गया, जहां दूर-दूर से आए श्रद्धालुओं ने आचार्य पदवी समारोह में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इस धार्मिक समारोह में श्रद्धालुओं की अप्रत्याशित भीड़ ने आयोजन की महत्ता को और बढ़ा दिया।
आयोजकों ने भीड़ प्रबंधन के लिए विशेष व्यवस्था की थी, जिससे सभी श्रद्धालु सुरक्षित रूप से कार्यक्रम का हिस्सा बन सके। एलईडी स्क्रीन के माध्यम से प्रसारण ने यह सुनिश्चित किया कि कोई भी श्रद्धालु इस पावन अवसर से वंचित न रहे।