रतलाम। भोपाल में भोज मुक्त विश्वविद्यालय की बीए प्रथम वर्ष की परीक्षा में धोखाधड़ी के मामले में दो आरोपियों को कोर्ट ने दो-दो साल की सजा सुनाई है। प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी हर्षिता पिपरेवार ने दोनों को दो-दो साल का कठोर कारावास और दो-दो हजार रुपए का जुर्माना लगाया है।
सहायक जिला अभियोजन अधिकारी सुनील सिंह खेर और भूपेंद्र कुमार सांगते ने बताया कि यह मामला 15 जून 2015 का है। शासकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय कालूखेड़ा की प्राचार्य संजना चौहान ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। स्कूल में भोज मुक्त विश्वविद्यालय की बीए प्रथम वर्ष की परीक्षा चल रही थी।
परीक्षा में पंचेड़ निवासी गोपाल जाट की जगह उसका जीजा देवकरण चौधरी, जो कंसेर का रहने वाला है, परीक्षा दे रहा था। पर्यवेक्षक कालूराम परिहार को जब उपस्थिति पत्रक पर हस्ताक्षर कराते समय प्रवेश-पत्र पर फोटो नहीं मिला तो उन्होंने प्राचार्य को सूचित किया।
जांच में पता चला कि परीक्षार्थी गोपाल की जगह उसका जीजा देवकरण परीक्षा दे रहा था। पुलिस ने दोनों के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज किया। आरोपियों पर आईपीसी की धारा 419, 420, 120बी और मध्य प्रदेश मान्यता परीक्षा अधिनियम 1984 की धारा 3, 4 के तहत मामला दर्ज किया गया था। कोर्ट ने दोनों को दोषी मानते हुए सजा सुनाई है।