भोपाल। मध्य प्रदेश में शिक्षक चयन परीक्षा को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। 20 मार्च से होने वाली इस परीक्षा में संविदा कर्मचारियों के अधिकारों की अनदेखी की गई है। नई संविदा नीति के तहत मिलने वाले 50 प्रतिशत आरक्षण और आयुसीमा में 5 वर्ष की छूट को नजरअंदाज कर दिया गया है।
स्कूल शिक्षा विभाग ने परीक्षा नियमावली तैयार करते समय 22 जुलाई 2023 की नई संविदा नीति को नजरअंदाज कर 5 जून 2018 की पुरानी नीति को आधार बनाया। इस गंभीर चूक के कारण लगभग 20 हजार संविदा कर्मचारी परीक्षा के लिए आवेदन करने से वंचित हो रहे हैं। प्रभावित कर्मचारियों में कस्तूरबा गांधी विद्यालय की शिक्षिकाएं, बालिका छात्रावास की सहायक वार्डन, बीआरसी और बीएसी भी शामिल हैं। सभी प्रभावित कर्मचारी डीएड-बीएड सहित आवश्यक योग्यताएं रखते हैं।
हालांकि मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल ने आवेदन की अंतिम तिथि 11 से बढ़ाकर 20 फरवरी कर दी है, लेकिन संविदा कर्मचारियों की मूल समस्या का समाधान नहीं हुआ है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब नई नीति में पुरानी सभी नीतियों को अधिक्रमित किया जा चुका है, तो पुरानी नीति के आधार पर नियमावली तैयार करना नियमों का उल्लंघन है। उल्लेखनीय है कि इससे पहले इस परीक्षा में ईडब्ल्यूएस (कमजोर आय वर्ग) के अभ्यर्थियों की अनदेखी का मामला सामने आ चुका है। दो दिन पहले ही इस मामले में हाईकोर्ट ने ईडब्ल्यूएस अभ्यर्थियों को आयुसीमा में छूट देने के निर्देश दिए हैं।
स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने परीक्षा नियमावली तैयार करते हुए यह ध्यान ही नहीं दिया कि 22 जुलाई 2023 को नई संविदा नीति लागू हो चुकी है। जिसमें साफ कहा है कि पुरानी सभी नीतियां अधिक्रमित की जा चुकी हैं। अधिकारियों ने 5 जून 2018 की नीति के अनुसार नियमावली तैयार कर दी। कर्मचारी कहते हैं कि सामान्य प्रशासन विभाग से छूट लेने की बात है, तो कैबिनेट की निर्णय पर कोई अधिकारी कैसे छूट दे सकता है।