उज्जैन। शुक्रवार से यूनाइटेड कॉन्शियसनेस संस्था द्वारा विश्व शांति पर केंद्रित तीन दिवसीय ष्ग्लोबल यूनाइटेड कॉन्शियसनेस कॉन्क्लेव 2025 का शुभारंभ हो गया है, जो 16 फरवरी तक चलेगा। इस सम्मेलन में 22 देशों के ख्याति प्राप्त आध्यात्मिक गुरुओं, योगाचार्यों और वैश्विक विचारकों की उपस्थिति में विश्व शांति, योग, ध्यान और आध्यात्मिकता पर गहन विचार-विमर्श होगा।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भोपाल से ऑनलाइन जुड़कर कॉन्फ्लेव में मौजूद प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए उन्हें संबोधित किया।ष्बता दे कालिदास अकादमी में आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार, योगाचार्य डॉ. एचआर नागेंद्र, डॉ. विनय सहस्रबुद्धे, इटली से यूरोपियन योगा फेडरेशन के अध्यक्ष स्वामी सूर्यनंद सरस्वती, कनाडा के चिन्मय मिशन के आचार्य विवेक जी, प्रोजेक्ट सेल्फ यूएसए के निदेशक राजेश रविंद्रनाथ तथा कई प्रतिष्ठित हस्तियां भी इस महोत्सव में शामिल होंगी।
धर्मेंद्र सिंह लोधी ने कहा-सारा संसार हमारा कुटुंब
कार्यक्रम में संस्कृति और पर्यटन मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी ने अपने संबोधन में कहा कि ष्यह मेरा है, यह तुम्हारा है, यह छोटे लोग बोलते हैं, लेकिन हमारी भारतीय संस्कृति कहती है कि सारा संसार हमारा कुटुंब है, हमारा परिवार है। हमारी संस्कृति यह मानती है कि श्सर्वे भवंतु सुखिनः, सर्वे संतु निरामयाश् यानी सभी सुखी हों, सभी निरोगी हों, और सबका कल्याण हो।
अगर कोई व्यक्ति इस विचारधारा को अपनाता है, तो यह हमारी भारतीय संस्कृति का हिस्सा है। जब हम बात करते हैं विश्व में शांति की, तो भारतीय विचारधारा शांति लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। यह विचारधारा किसी एक धर्म से संबंधित नहीं है, बल्कि यह मानवता को आगे बढ़ाने वाली है।
अलग-अलग देशों की मिट्टी और जल उज्जैन लाएंगे
यूनाइटेड कॉन्शियसनेस के वैश्विक संयोजक विक्रांत तोमर ने बताया कि दुनिया भर उज्जैन आने वाले विद्वान योग गुरु अपने-अपने देशों की नदियों का जल भरकर लाएंगे। 14 तारीख को सभी जल को एकत्रित कर भगवान महाकाल को अर्पित किया जाएगा। जिससे ये सन्देश देंगे की एक ही जल है दुनिया भर में, साथ ही हर देश से 100 ग्राम मिटटी मंगाई है इससे धरती का मॉडल बनाएंगे जिसे बाद इसी मॉडल को पीएम मोदी को भेट किया जाएगा इससे धरती एक होने का सन्देश देंगे। दुनिया भर से आने वाले लोग 10 सेंटीमीटर की लकड़ी का टुकड़ा पाने साथ लायेंगे। इससे कालिदास अकादमी में यज्ञ होगा।