BREAKING NEWS
NMH MANDI : एक क्लिक में पढ़े कृषि उपज मंडी नीमच के.. <<     BIG NEWS : साइबर ठगी मामले में कपासन पुलिस की बड़ी.. <<     NEWS : रोलाहेड़ा ग्रामीण सेवा शिविर का किया.. <<     NEWS : उद्यान, कृषि व आत्मा समितियों की संयुक्त.. <<     BIG NEWS : सीवरेज चैंबर बना मौत का कुंड, एक को बचाने.. <<     KHABAR : शासकीय छात्रावासों में प्रवेश के लिए.. <<     KHABAR : आखिरी सांस तक करूंगा धर्म रक्षा, दिग्विजय.. <<     KHABAR : महावीर इंटरनेशनल प्रियदर्शिनी ने.. <<     MANDI BHAV : एक क्लिक में पढ़े कृषि उपज मंडी मनासा के.. <<     BIG NEWS : राजस्थान के चित्तौड़गढ़ में केंद्रीय.. <<     BIG REPORT : समय-सीमा बैठक में कलेक्टर के सख्त.. <<     KHABAR : बेरोजगार युवाओं के लिए अवसर, जुलाई माह की.. <<     शहडोल में रिश्वत लेते पकड़ा गया डॉक्टर,.. <<     देवास में किन्नर बनकर लूट करने वाला गिरोह.. <<     करणी सेना परिवार ने एसपी यशपाल सिंह राजपूत को.. <<     खरगोन के आस्था ग्राम ट्रस्ट को बड़ी मदद,.. <<     BIG REPORT : एसपी ने जनसुनवाई में सुनी 51 फरियादियों.. <<    
वॉइस ऑफ़ एमपी न्यूज़ चैनल में विज्ञापन के लिए..
February 14, 2025, 4:30 pm
KHABAR : केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय भोपाल का चार दिवसीय रूपक महोत्सव संपन्न, कौण्डिन्य प्रहसनम और पल्लीकमलम नाटक ने मोहा मन, ओडिसी नृत्य ने बांधा समां, पढे़ खबर 

Share On:-

भोपाल। रविंद्र भवन के अंजनी सभागार में आयोजित केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के अखिल भारतीय रूपक महोत्सव का चार दिवसीय आयोजन आज संपन्न हुआ। समापन दिवस पर तीन शानदार प्रस्तुतियों ने दर्शकों का मन मोह लिया।


पहली प्रस्तुति में केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय सदाशिव परिसर, पुरी से आए कलाकारों ने कौण्डिन्य प्रहसनम पेश किया। इस विनोदपूर्ण प्रस्तुति में पुराण पुरुषोत्तम जगन्नाथ और पुरुषोत्तम क्षेत्र के भोजन वैभव को दर्शाया गया। हास्य के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि मानव जीवन में प्राण वायु के साथ-साथ भोजन भी उतना ही महत्वपूर्ण है।


दूसरी प्रस्तुति में केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, भोपाल परिसर ने राम चौधरी रचित श्पल्लीकमलमश् नाटक प्रस्तुत किया। नाटक की मुख्य पात्र कमलकलिका की भूमिका जागृति जैन ने निभाई। कहानी एक साधारण नौका चालक रूप कुमार (आर्यन शर्मा) और कमलकलिका के प्रेम की है। अन्य कलाकारों में अंजलि (कंचनकणिका), चंड (सारिका), स्मृति (तरंगिणी) और दीपक (ब्रह्मपद) ने अपनी भूमिकाओं से मंच को जीवंत कर दिया।


कार्यक्रम की अंतिम प्रस्तुति में नाट्यशास्त्र अध्ययन अनुसंधान केंद्र की ओर से कल्याणी फगरे ने ओडिसी नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति दी, जिसने समारोह के समापन को यादगार बना दिया।


समापन सत्र में ब्रह्मर्षि मुदगुलनागफणी शर्मा (लव्ध पद्मश्री), डॉ. मार्गिमधु (निदेशक, कुटियाट्टम नेपथ्यकेन्द्रम, केरल), प्रो आर. जी. मुरलीकृष्ण (कुलसचिव, केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली), डॉ. मीरा द्विवेदी (संस्कृत विभाग, दिल्ली विश्वविद्यालय) और श्री गणपति हेगड़े (प्राचार्य, एम. एल. ए. विद्यालय, मालकेश्वरम) जैसे विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता की केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय भोपाल परिसर के निदेशक प्रो रमाकांत पाण्डेय ने। समस्त अतिथियों का स्वागत कार्यक्रम के निदेशक प्रो मधुकेश्वर भट्ट ने किया ।


कार्यक्रम के संयोजक प्रो नीलाभ तिवारी ने प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए कहा कि चार दिन तक चला यह आयोजन भारतवर्ष के विभिन्न भागों से आए प्रतिभागियों के भावपूर्ण अभिनय से दर्शकों के मन को भाव विभोर कर गया। प्राचीन भारत से लेकर वर्तमान भारत तक के समय के प्रासंगिक विषयों पर आधारित इन नाटकों ने एक ओर समाज की विभिन्न स्थितियों पर प्रकाश डाला वहीं दूसरी ओर इसने मानव मस्तिष्क व मन के अंतरद्वंद्व को प्रस्तुत किया।


केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के कुल सचिव प्रो आर जी मुरलीकृष्ण ने इस कार्यक्रम में अपनी विशिष्ट उपस्थिति दर्ज कराई। उन्होंने अपने उद्बोधन में कार्यक्रम के आयोजकों को बधाई देते हुए समस्त छात्र-छात्राओं, प्रतिभागियों व मार्गदर्शकों का उत्साह वर्धन किया उन्होंने कहा कि समस्त छात्र केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के प्राण वायु हैं ।उनके अध्ययन तथा पाठ्य सहगामी गतिविधियों में उत्साह पूर्ण भाग लेने से ही विश्वविद्यालय का गौरव बढ़ता है ।


कार्यक्रम की सफलता पर प्रो रमाकांत पाण्डेय ने कहा, ष्नाट्य कला ने कलाकारों के व्यक्तित्व को निखारते हुए दर्शकों के दिलों को छुआ। भविष्य में इस प्रकार की प्रस्तुतियाँ निरंतर होती रहेंगी।ष् उन्होंने समस्त प्रतिभागियों की प्रशंसा करते हुए कहा कि नाट्य प्रस्तुति देने वाले समस्त कलाकार एवं प्रस्तुति को तैयार करने में योगदान दे रहे समस्त प्रतिभागी प्रशंसा के पात्र हैं। नाट्य एक ऐसी कला है जो कलाकार के स्वयं के व्यक्तित्व को निखारते हुए विभिन्न चरित्रों के सजीव प्रदर्शन के द्वारा अभिनय कलाकार व दर्शक दोनों ही के अंतर्मन व व्यक्तित्व को संवारती है। रस की अनुभूति से मानव मन आनंदित होने के साथ-साथ अपने अंर्तमन की जटिलताओं को भी नियंत्रित करने में सक्षम होता है। उन्होंने केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय नई दिल्ली के कुलपति प्रो श्रीनिवास वरखेड़ी को धन्यवाद दिया कि उन्होंने इस वर्ष के अखिल भारतीय रूपक महोत्सव का आयोजन करने का दायित्व भोपाल परिसर को दिया। समापन सत्र प्रो सनंदन कुमार त्रिपाठी ने धन्यवाद ज्ञापन और प्रो कृपा शंकर शर्मा के संचालन के साथ किया।
 

VOICE OF MP
एडिटर की चुनी हुई ख़बरें आपके लिए
SUBSCRIBE