मंदसौर। पशुपालन एवं डेयरी विभाग तथा कृषि विज्ञान केन्द्र, मन्दसौर के सयुक्त प्रयास से पशुपालन संगोष्ठी का आयोजन पशुपालन एवं पशु कल्याण जागरुकता माह के अन्तर्गत किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. आई.एस. तोमर अधिष्ठाता उद्यानिकी महाविद्यालय, मन्दसौर ने उपस्थित पशुपालकों से अपील की कि पशुओं की सही देखभाल सही समय पर करने से पशुओं के दूध उत्पादन एवं स्वास्थ में बढोत्तरी होती है। अतः पशुपालक भाई इसका विशेष ध्यान रखे। पशुपालन संगोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे डॉ. मनीष इंगोले, उपसंचालक पशुनपालन एवं डेयरी विभाग ने कहा कि राष्ट्रीय पशुधन मिशन के अन्तर्गत बकरी पालन, मुर्गी पालन, सुवर पालन एवं साइलेज तथा फोडर ब्लाक इकाई हेतु सभी वर्ग के हितग्राहियों के लिए 50 प्रतिशत तक का अनुदान दिया जाता है।
अतः पशुपालन में रुचि रखने वाले इसका अधिक से अधिक लाभ उठाये। कार्यक्रम मे तकनीकी जानकारी डॉ. डी.के. जैन ने अति उपसंचालक ने पशुपालन प्रबंधन, भूसा का युरिया उपचार तथा पशुपालन से रोजगार सृजन हेतु विभिन्न विभागीय योजना की जानकारी दी। डॉ. ममता डोडियार, पशु चिकित्सक (सहायक शल्यज्ञ) ने गाय, भैंस एवं बकरियों की नस्ल के बारे में जानकारी दी।
डॉ. रीना धाकड़, पशु चिकित्सक नाहारगढ, कयामपुर ने बकरी पालन, बिमारी के कारण लक्षण एवं उपचार की जानकारी दी तथा डॉ. राजू अवास्या, पशु चिकित्सक धुधड़का ने बीमारी की रोकथाम हेतु भैस बकरियों में टीकाकरण के बारे में बताया एवं डॉ. जी.एस चुण्डावत, वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख, कृषि विज्ञान केन्द्र, मन्दसौर ने बताया की कृषि एवं पशुपालन एक-दूसरे के पूरक है। इसलिए कृषक भाईयो को कृषि से उत्पन्न अवशेषों का उपयोग के लिए तथा निरन्तर आय प्राप्त करने के लिए पशुपालन को एक व्यवसाय के रूप में प्रारम्भ करे।