भोपाल। मप्र शासकीय स्वशासी चिकित्सक महासंघ की कार्यकारिणी समिति की बैठक दिनांक 16.02.2025 को गांधी चिकित्सा महाविद्यालय, भोपाल के सभागार में आयोजित की गई।
चिकित्सा महासंघ की कार्यकारिणी समिति की बैठक में 07 घटक संगठनों के प्रदेश स्तर, संभाग स्तर एवं जिले स्तर के 150 से अधिक पदाधिकारी सम्मिलित हुये। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. अभिजीत देशमुख वरिष्ठ सर्जन एवं अध्यक्ष चिकित्सा प्रकोष्ठ मप्र में उपस्थित थे।
कार्यकारिणी समिति की बैठक को चिकित्सक महासंघ के मुख्य संयोजक डॉ. राकेश मालवीया और संयोजक डॉ. माधव हासानी ने संबोधित किया। इस महत्वपूर्ण बैठक में सभी घटक संगठनों के पदाधिकारियों ने अपने विभाग के लंबित विषयों एवं एजेंडे पर चर्चा की।
चिकित्सा महासंघ की कार्यकारिणी समिति की बैठक में प्रमुख मांगो पर चर्चा हुई-
1. उच्च स्तरीय समिति का गठन- चिकित्सकों की लंबित मांगों के त्वरित निराकरण हेतु चिकित्सा महासंघ के पदाधिकारियों को सम्मिलित कर उच्च स्तरीय समिति का गठन किया जाना। उच्च स्तरीय समिति की नियमित बैठक आयोजित किया जाए जिसकी त्रैमासिक समीक्षा मुख्यमंत्री करें
2. विभागों में प्रशासकीय अधिकारियों की दखलंदाजी को समाप्त किया जाना।
3. म.प्र. मंत्रिपरिषद दिनांक 04.10.2023 के निर्णय/आदेश अनुसार चिकित्सा शिक्षकों को 7वे वेतनमान का लाभ और प्रदेश के सभी विभागों के चिकित्सकों के NPA के साथ मूल वेतन का निर्धारण किया जाए।
4. प्रदेश के विभिन्न विभागों के चिकित्सकों को स्वीकृत समयमान वेतनमान (डीएसीपी समकक्ष) के आदेश का तय समयसीमा में त्वरित क्रियांवयन किया जाए।
5. लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग में डायरेक्टर जनरल पब्लिक हेल्थ एवं डायरेक्टर जनरल मेडिकल एडुकेशन के पदों का सृजन किया जाए और इन पदों पर वरिष्ठता के अनुक्रम में चिकित्सकों को ही नियुक्त किया जाए।
6. कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज की घटना के बाद चिकित्सकों एवं पैरामेडिकल स्टाफ की सुरक्षा एवं कार्यक्षेत्र की व्यवस्था के संबंध सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार गठित नेशनल टास्क फोर्स की रिपोर्ट को तत्काल लागू किया जाए और इस हेतु अतिरिक्त बजट की व्यवस्था की जाए।
महासंघ के मुख्य संयोजक डॉ राकेश मालवीया ने अपने संबोधन में प्रदेश के समस्त चिकित्सा संगठनों के पदाधिकारियो को संबोधित कर उन्हें प्रदेश की जनता के हित में अधिक से अधिक समर्पित चिकित्सीय कार्य नितदिन करने को कहा, उन्होंने कहा कि जिस प्रकार महासंघ ने प्रदेश की जनता के हित में अमानक दवाइयों और जिला अस्पतालों के प्राइवेटाइजेशन का विरोध कर उनके प्रस्तावों को निरस्त कराया था इसी भांति संगठन की प्रत्येक जिला एवं मेडिकल कॉलेज इकाई को अपने-अपने स्तर पर प्रशासनिक दखलअंदाजी के कारण आम जनता को हो रही परेशानी को संबोधित कर उसका निराकरण ढूंढना चाहिए।"
चिकित्सकों के प्रदेशव्यापी आंदोलन को 20 फरवरी से प्रारंभ किये जाने का निर्णय लिया गया।
1. 20 एवं 21 फरवरी को काली पट्टी लगाकर विरोध प्रदर्शन।
2. 22 फरवरी को आधे घंटे कार्यस्थल के बाहर टोकन विरोध प्रदर्शन(इमरजेंसी सेवा चालू रहेगी।) साथ ही चिन्हित अस्पतालों पर अमानक दवाइयों की सांकेतिक होली जलाई जाएगी।
3. 24 फरवरी को प्रदेशव्यापी "सामूहिक उपवास" कर अन्न त्याग कर 1 घंटे कार्यस्थल के बाहर विरोध प्रदर्शन (इमरजेंसी सेवा चालू रहेगी)
4. 25 फरवरी से प्रदेशव्यापी उग्र आंदोलन।
उपरोक्त बैठक में डॉ राजेंद्र माठे, डॉ गजेंद्र नाथ कौशल,डॉ रितेश तँवर, डॉ राहुल रोकड़ें, डॉ दिनेश मांडवे, डॉ अभिजीत सिंह चौहान, डॉ आर सी वर्मा, डॉ राजेश टिक्कस,डॉ अविनाश ठाकुर, डॉ आदित्य सक्सेनाएवं जुडा अध्यक्ष डॉ कुलदीप गुप्ता साथ ही समस्त जिला, संभाग, मेडिकल कॉलेज के पदाधिकारी उपस्थित रहें। कार्यक्रम का संचालन डॉ अशोक ठाकुर एवं डॉ राजेश टिक्कस द्वारा किया गया।
डॉ. अशोक ठाकुर, महासचिव पीएमटीए ने कार्यकारिणी समिति में पधारे पदाधिकारियों और आयोजन पर आभार व्यक्त किया।