इंदौर। सोमवार से शुरू हुई गिद्धों की गणना मंगलवार को भी जारी रही। दूसरे दिन भी उन्हीं स्थानों पर गिद्ध मिले, जहां सोमवार को देखे गए थे। दो दिन में 29 गिद्ध गिने गए हैं। इनमें 23 वयस्क और 6 अवयस्क हैं। सबसे ज्यादा गिद्ध इंदौर सिटी में मिले हैं। ट्रेंचिंग ग्राउंड, रालामंडल, देवगुराड़िया क्षेत्र में ही 12 गिद्ध देखे गए हैं। यह स्थान गिद्धों के लिए अनुकूल है। चोरल में 5, महू में भी 5 गिद्ध देखे गए हैं।
मानपुर रेंज में एक भी गिद्ध नहीं देखा गया। एसडीओ कृष्णा निनामा के मुताबिक बुधवार को भी गणना जारी रहेगी। मंगलवार को भी नए गिद्ध नहीं मिले। इंदौर वन मंडल में ज्यादा इजिप्शियन प्रजाति के गिद्ध मिले हैं। इसके बाद सफेद पीठ वाले गिद्ध नजर आए हैं।
एसडीओ के मुताबिक सिटी एरिया में ऊंचाई वाले वृक्ष कम हो गए हैं। मोबाइल टॉवर के टॉप पर गिद्ध ने घोंसला बनाया है। इस पर एक गिद्ध बैठा हुआ भी दिखा है। रालामंडल में भी पहाड़ी पर एक गिद्ध नजर आया है। दरअसल, रालामंडल, देवगुराड़िया के बीच ट्रेंचिंग ग्राउंड है। इस वजह से गिद्ध एक से दूसरी पहाड़ी पर जाकर बैठ जाते हैं। ऊंचाई वाले पेड़ कम होने की वजह से इनके घोंसले भी पूरे वन मंडल में महज 3 ही मिले हैं। इनमें दो महू में हैं और एक चोरल में मिला है।
4 साल पहले 117 गिद्ध मिले थे
2021 की गणना में 117 गिद्ध मिले थे। अकेले इंदौर में वयस्क 46 और अवयस्क 71 गिद्ध मिले थे। देवगुराड़िया में 36, पेडमी में 47, गिद्ध खो में 7, चिकली में 2, तिन्छा में 1, पठानपीपल्या में 17, भड़किया वनक्षेत्र में भी 2 गिद्ध मिले थे, जिसमें महू-मानपुर में गिद्ध नजर तक नहीं आए थे। 2024 की गणना में 86 गिद्ध मिले थे।
हमारे लिए इसलिए जरूरी हैं गिद्ध
गिद्ध गंदगी दूर करने वाला पक्षी है। यदि प्रकृति में यह सफाईकर्मी पक्षी न हो तो मृत अवशेष से वातावरण दूषित हो जाएगा। गिद्ध प्रकृति के अपशिष्टों को नष्ट करने वाले होते हैं। गिद्ध की खानपान की आदतें पारिस्थितिकी तंत्र या ईको सिस्टम के लिए जरूरी हैं।