नीमच। श्री सीताराम जाजू शासकीय कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय नीमच में भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र मुंबई के वैज्ञानिकों द्वारा दो दिवसीय कार्यशाला का आज समापन हुआ। कार्यशाला के द्वितीय दिवस का शुभारंभ मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. एन के डबकरा ने अतिथि वैज्ञानिकों डॉ. शिल्पा त्रिपाठी, डॉ. योगेश कुमार, डॉ. मंगलानंद एवं किरणकुमार गोराई का स्वागत करते हुए बताया कि विकसित भारत के लिए न्यूक्लियर एनर्जी का उपयोग करने के संबंध में शोध कार्य बढ़ता जा रहा है।
आज द्वितीय दिवस डॉ. योगेश कुमार एवं डॉ मंगलानंद के व्याख्यान संपन्न हुए। डॉ. योगेश कुमार ने अपने व्याख्यान में बिजली उत्पन्न करने के साधनों की चर्चा की। इसमें उन्होंने नियंत्रित तथा अनियंत्रित साधनों के बारे में बताया। उन्होंने नाभिक से शुरुआत करके ऊर्जा के साधन जैसे कि गैस, कोयला इत्यादि की रासायनिक क्रियाएं समझाई। इसके बाद नाभिकीय ऊर्जा कैसे उत्पन्न की जाती है इस पर प्रकाश डाला। भारत में अलग-अलग स्थानों पर जो नाभिकीय संयंत्र हैं,वे किस तरह के हैं और उनसे बिजली कैसे बनाई जाती है,उनमें क्या नाभिकीय प्रतिक्रिया होती है - इस पर विस्तार से चर्चा की गई। इसी चर्चा को आगे बढ़ाते हुए डॉ. मंगलानंद ने न्यूक्लियर रिएक्टर संबंधी मिथकों के बारे में चर्चा की। उन्होंने न्यूक्लियर रिएक्टर्स एवं सिंक्रोटोन विकिरण साधन से निकलने वाले विकिरणों के बारे में समझाया। ये विकिरणें आसपास के वातावरण एवं इंसानों को किस तरह प्रभावित कर सकते हैं, इसका विवरण देते हुए डॉ. मंगलानंद ने विकिरणों को फैलने से रोकने के लिए किए जाने वाले उपायों के बारे में बताया। भारत में सभी तरह के विकिरण साधनों में इस तरह के उपाय किए गए हैं जिसके कारण न्यूक्लियर रिएक्टर्स एवं सिंक्रोटोन साधनों पर विशेष सावधानियां रखी जाती है और इस तरह वहां कार्यरत किसी भी व्यक्ति को किसी प्रकार की हानि नहीं होती। कार्यक्रम का समापन डॉ. मंगलानंद द्वारा छात्राओं को बेहतर भविष्य के लिए नौकरी के अवसर जो परमाणु ऊर्जा विभाग में प्राप्त हो सकते हैं,बताकर किया गया। अंत में डॉ. शिल्पा त्रिपाठी ने प्राचार्य महोदय एवं सभी उपस्थित श्रोताओं के प्रति आभार व्यक्त किया। संपूर्ण कार्यशाला का संचालन एवं आभार प्रदर्शन डॉ.हिना हरित ने किया।