रतलाम। मध्य प्रदेश में अधिवक्ता अधिनियम में किए गए संशोधन के विरोध में शुक्रवार को रतलाम में वकील अपने कार्य से विरक्त रहे। कोर्ट से बाइक रैली निकाल कलेक्ट्रेट पहुंचे। यहां राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन एसडीएम अनिल भाना को सौंपा।
वकीलों के कार्य से विरक्त रहने के बावजूद कोर्ट खुली रही। लेकिन वकीलों ने पैरवी नहीं की। ग्रामीण अंचल से आए लोगों को जरूर परेशानी हुई। वकीलों ने इस संशोधन के खिलाफ एकजुट होकर आज का दिन प्रतिवाद दिवस के रूप मनाया।
सौंपे गए ज्ञापन में बताया अधिवक्तागण समाज के जिम्मेदार प्रबुद्ध नागरिकों की श्रेणी में आते हैं। शासन स्तर पर अधिवक्ता विरोधी कई प्रकार के निर्णय लिए जाने लगे हैं। अधिवक्ताओं के विरुद्ध हो रहे अपराध पर शासन द्वारा मौन धारण कर लिया जाता है। अधिवक्ता प्रोटेक्शन एक्ट की मांग पूरी नहीं की जा रही है।
हितों के खिलाफ किए गए बदलाव
अधिवक्ताओं का कहना है कि अधिनियम में किए गए बदलाव उनके हितों के खिलाफ हैं। अगर यह कानून लागू हुआ, तो वकीलों की स्वतंत्रता और निष्पक्षता प्रभावित होगी। केंद्र सरकार द्वारा लाया गया एडवोकेट एक्ट अमेंडमेंट बिल-2025 सिर्फ मध्य प्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे देश में विरोध का सामना कर रहा है। यह वकीलों के अधिकारों के खिलाफ है। इसे किसी भी हाल में स्वीकार नहीं किया जाएगा। वकीलों का कहना है कि वे पहले भी सरकार से एडवोकेट्स प्रोटेक्शन एक्ट लागू करने की मांग कर चुके हैं, लेकिन अब तक इस पर कोई कदम नहीं उठाया गया है।
यह रहे उपस्थित
ज्ञापन सौंपने के दौरान रतलाम अभिभाषक संघ अध्यक्ष राजीव ऊबी, उपाध्यक्ष पंकज कटकानी, सहसचिव श्रवण बोयत, कोषाध्यक्ष उदय कसेड़िया, पूर्व अध्यक्ष सुनील पारीख, अभय शर्मा, सुनील लाखोटिया, विमल छिपानी, पंकज बिलाला, कल्पना काले, सुनीता छाजेड़ आदि बड़ी संख्या में वकील मौजूद रहे।