शाजापुर। जिले के पोलाय खुर्द गाँव मे अनोखे तरीके से होली मनाई जाती है जहां, इसे आस्था कहे या अंधविश्वास कई सालों से अंगारो में चलने की ये परंपरा ग्रामीण निभाते हुए आ रहे हैं. वहीं, 21वीं सदी में भी लोग इस परंपरा को निभाते हुए दिखाई दे रहे हैं. आधुनिक युग में भी ग्रामीणों ने पुरखों की परंपरा को जारी रखने का काम किया है. यहां आज भी होली दहन के समय दहकते अंगारों से नंगे पैर होकर लोग निकलते हैं.ग्रामीणों में मान्यता है कि अंगारों की जलती चूल पर चलने से श्रद्धालुओं की सभी मनोकामना पूर्ण होती है. वहीं, इस परंपरा को देखने के लिए हजारो की मात्रा में लोग इस मंदिर पर पहुंचते हैं।
पोलायकला तहसील के अर्तगत ग्राम पोलायखुर्द गांव में होली का त्योहार अनोखे तरीके से मनाया जाता है। यहां पर धधकते अंगारों पर नंगे पैर चलने की परंपरा है, जो कई वर्षों से चली आ रही है। जिसे आज भी ग्रामीणो के द्वारा निभाई जाती है आस्था और लोकरिति ग्रामीणों का कहना है कि यह परंपरा उनके गांव में कब शुरू हुई, इसकी कोई सटीक जानकारी नहीं है। लेकिन बुजुर्ग ग्रामीणों के अनुसार यह परंपरा कई वर्षों से चली आ रही है। ग्रामीणों का दावा है कि इतने गरम अंगारों पर चलने के बाद भी न तो उनके पैरों में छाले पड़ते हैं और न ही किसी तरह की तकलीफ होती है।
गल महादेव की पूजा अर्चना
इस आयोजन में पहले गल महादेव की विशेष पूजा अर्चना की जाती है, इसके बाद में पलास की लकड़ी में आग लगाकर अंगारे बनाए जाते हैं। इसके बाद अंगारों से नंगे पैर ग्रामीणों के निकलने का सिलसिला शुरू होता है, जो करीब 30 मिनट तक चलता है।
मेले का आयोजन होली के दिन यहां मेले के साथ चूल का आयोजन किया जाता है। जिन अंगारों से ग्रामीण निकलते हैं, उन्हें गल महादेव के मंदिर प्रांगण में रखा जाता है। इस आयोजन में हजारों की संख्या में श्रद्धालु भाग लेते हैं।