मंदसौर। भारत सेमीकंडक्टर मिशनभारत को इलेक्ट्रॉनिक्स, विनिर्माण और सेमीकंडक्टर उद्योग का वैश्विक हब बनाने के विज़न को पूरा करने में एक बड़े कदम के रूप में काम करेगा। इसको लेकर सांसद गुप्ता ने लोकसभा में प्रश्न किया। सांसद सुधीर गुप्ता ने प्रश्नकाल के दौरान कहा कि भारत सेमीकंडक्टर मिशन के तहत देश के सेमीकंडक्टर क्षेत्र में कौशल विकास सहित प्रशिक्षण गतिविधियों को सुकर बनाने का प्रस्ताव है। इसके लिए सरकार द्वारा क्या कदम उठाएं जा रहे है। इसी के साथ ही उक्त क्षेत्र में व्यक्तियों को प्रशिक्षित करने और कौशल प्रदान करने के लिए क्या भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) और निजी कॉलेजों जैसे संस्थानों के साथ सहयोग किया है और सरकार का लोगों को विदेशों में जहां ऐसी सुविधाएं उपलब्ध हैं, वहां प्रशिक्षण प्रदान करके उन्हें कौशल प्रदान करने का प्रस्ताव और इस पर कितना व्यय होने की संभावना है।
प्रश्न के जवाब में इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने बताया कि सरकार ने देश में सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम के विकास के लिए 76,000 करोड़ रुपये के कुल परिव्यय के साथ सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम को मंजूरी दी है। सेमीकंडक्टर विनिर्माण बहुत जटिल और प्रौद्योगिकी गहन क्षेत्र है जिसके लिए विशेष कुशल जनशक्ति अपेक्षित है। इसके समाधान के लिए सरकार द्वारा अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) ने सेमीकंडक्टर डोमेन में प्रतिभा पूल के सृजन की दिशा में एक कदम के रूप में इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में बीटेक (बहुत बड़े पैमाने पर एकीकरण (वीएलएसआई) डिजाइन और प्रौद्योगिकी), एकीकृत सर्किट (आईसी) विनिर्माण में डिप्लोमा और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग (वीएलएसआई डिजाइन और प्रौद्योगिकी) में माइनर डिग्री के लिए नया पाठ्यक्रम शुरू किया है। इसी के साथ ही सरकार ने चिप्स टू स्टार्टअप कार्यक्रम शुरू किया है जिसमें वीएलएसआई और एम्बेडेड सिस्टम डिजाइन में लगभग 113 प्रतिभागी संस्थानों में 85,000 उद्योग हेतु तैयार कर्मचारियों को प्रशिक्षित करने की योजना बनाई गई है। अब तक सी2एस कार्यक्रम के तहत 113 संगठनों में प्रशिक्षण के लिए 43,000 से अधिक इंजीनियरिंग छात्रों को शामिल किया गया है।
उन्होने बताया कि वीएलएसआई और एम्बेडेड सिस्टम डिजाइन में 5 वर्षों के भीतर देश भर में एक लाख इंजीनियरों को प्रशिक्षित करने के उद्देश्य से वर्ष 2022 में नाइलिट कालीकट में एक कुशल जनशक्ति प्रगत अनुसंधान और प्रशिक्षण (स्मार्ट) प्रयोगशाला स्थापित की गई है। देश भर में स्मार्ट लैब का उपयोग करके 42,000 से अधिक इंजीनियरों को प्रशिक्षित किया गया है।
उन्होने बताया कि इसके अतिरिक्त, कौशल विकास को प्रोत्साहित करने के लिए इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (आईएसएम) द्वारा लैम रिसर्च के सेमीवर्स प्लेटफॉर्म के माध्यम से आगामी 10 वर्षों में 60,000 भारतीय इंजीनियरों को प्रशिक्षित करने के लिए आईआईएससी के साथ आईएसएम और लैम रिसर्च के बीच समझौता किया है और भारतीय छात्रों/पेशेवरों को प्रयोगशालाओं और अनुसंधान फोकल केंद्रों तक अभिगम प्राप्त करके और इंटर्नशिप एवं फेलोशिप कार्यक्रम स्थापित करके एक व्यापक कौशल आधार बनाने में मदद करने हेतु आईएसएम और आईबीएम के बीच समझौता किया है।
अत्याधुनिक अनुसंधान और विकास और उसके व्यावसायीकरण को बढ़ावा देना, भारत में कुशल प्रतिभा पूल और निवेश के अवसरों को क्यूरेट करना तथा भारतीय पेशेवरों को सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले स्पेस में अपनी क्षमता का पता लगाने में सक्षम बनाया जा सके इस हेतु पर्दू विश्वविद्यालय के साथ आईएसएम के बीच समझौता किया है।