नीमच। सीमेंट कॉर्पाेरेशन ऑफ इंडिया (सीसीआई) की फैक्ट्री के स्क्रेप की नीलामी की प्रक्रिया शुरू होने के बाद से ही जिले की राजनीति गरमाई हुई है। विगत 05 मार्च को हुई स्क्रेप की नीलामी की बीड जारी होते ही आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी चल रहा है। इसी बीच कल शुक्रवार को स्क्रेप की नीलामी को रोकने के लिए जिला प्रशासन ने एक बड़ा आदेश जारी किया। इस आदेश के माध्यम से कलेक्टर हिमांशु चंद्रा, जावद एसडीएम संघवी व तहसीलदार मयूरी जोक ने नीलामी की प्रक्रिया के फैसले पर रोक लगा दी।
आज शनिवार को प्रशासन की टीम मौके पर कुर्की की कार्रवाई के लिए पहुंची थी। लेकिन फैक्टरी के मैनेजर जे विश्वास के उपस्थित नहीं होने से यह कार्रवाई नहीं हो सकी।
सीसीआई प्लांट पर लगी मजदूरों की भीड़-
आपकों बता दें कि प्रशासन द्वारा की जाने वाली कुर्की की कार्रवाई की जानकारी लगते ही बड़ी संख्या में मजदूर व लोडर मौके पर पहुंचे थे। इस दौरान वॉईस ऑफ एमपी की टीम ने मजदूरों से चर्चा भी की। तुलसीराम खारोल ने बताया कि उनके पिताजी सीसीआई में लोडर थे। प्रशासन की कार्रवाई से कुछ राहत मिली है। कई लोडरों का कुल 17.5 करोड़ का भुगतान बाकी है। श्रम न्यायालय ने संपत्ति को बेचकर लोडरों को भुगतान करने के आदेश भी जारी किए थे। इसी को लेकर आज यह कार्रवाई की गई है।
सीसीआई प्रबंधन को दिया निर्देश-
सीसीआई के स्क्रैप नीलामी की प्रक्रिया पर जिला प्रशासन ने रोक लगा दी है। कुर्की की कार्रवाई के लिए आज जावद तहसीलदार मयूरी जोक, नयागांव के थाना प्रभारी मंगल सिंह सहित कई अन्य अधिकारी पहुंचे थे। लेकिन मौके पर फैक्टरी के मैनेजर के उपस्थित नहीं होने की वजह से कुर्की की कार्रवाई नहीं हो सकी। तहसीलदार ने बताया कि मैनेजर के विरूद्ध शासकीय कार्य में सहयोग न करने के लिए उन्हें नोटिस जारी किया जाएगा।
एशिया का सबसे बड़ा सीमेंट प्लांट था सीसीआई-
कामरेड़ शैलेंद्र सिंह ठाकुर ने बताया कि 1976 में सीसीआई प्लांट चालू हुआ था जो अब बंद होने की कगार पर पहुंच गया है। यह एशिया का सबसे बड़ा सीमेंट प्लांट था। सीमेंट प्लांट की इस दुर्दशा के पीछे जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों का बड़ा रोल है। 460 करोड़ में बनी इस फैक्टरी के स्क्रेप को सरकार ने नीलामी के लिए टेंडर जारी कर दिया था। अब प्रशासन ने इसकी नीलामी पर रोक लगा दी है। ठाकुर ने यह भी कहा कि हम प्लांट को पुनः चालू करवाने की मांग करते हैं। इसके लिए आवाज उठाते रहेंगे। साथ ही जो भी कर्मचारी व लोडर रहे हैं उनका बकाया भुगतान भी दिलवाएंगे।
प्रशासन का यह निर्णय स्वागत योग्य-
कांग्रेस नेता तरुण बाहेती ने बताया कि प्रशासन का यह निर्णय स्वागत योग्य है। मजदूरों और कर्मचारियों के वाजिब हक की लड़ाई श्रम न्यायालय मंदसौर और उच्च न्यायालय नई दिल्ली में लंबित है। केंद्र सरकार ने दोनों न्यायालयों को अंधेरे में रखकर नीलामी की थी। नीलामी की पूरी प्रक्रिया गुपचुप तरीके से की जा रही थी। नीमच जिला कांग्रेस ने इस नीलामी की प्रक्रिया का विरोध किया था। धरना प्रदर्शन कर मजदूरों के हितों में आवाज उठाई थी।