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March 23, 2025, 1:16 pm
KHABAR : विक्रमोत्सव 2025 अंतर्गत विक्रम नाट्य समारोह का हुआ भव्य शुभारंभ, कलाकारों ने सुनाई अहिल्या के अहिल्याबाई से देवी बनने की कहानी, पढ़े खबर 

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उज्जैन। महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ द्वारा विक्रमादित्य, उनके युग, भारत उत्कर्ष, नवजागरण और भारत विद्या पर एकाग्र विक्रमोत्सव 2025 अंतर्गत विक्रम नाट्य समारोह का शुभारंभ हुआ। कालिदास अकादमी के बहिरंग मंच पर अनिल दुबे द्वारा निर्देशित नाट्य प्रस्तुति श्देवी अहिल्याबाईश् का मंचन हुआ। इस प्रस्तुति के माध्यम से कलाकारों ने सुनायी अहिल्या के अहिल्याबाई से देवी बनने की कहानी। इसके पूर्व विक्रम विश्वविद्यालय के वरिष्ठ कार्यपरिषद सदस्य राजेश कुशवाह, विक्रम विश्वविद्यालय के वरिष्ठ पुराविद डॉ. रमण सोलंकी ने सभी कलाकारों का स्वागत किया।
प्रस्तु्ति में अहिल्याबाई के बचपन से लेकर अंतिम समय तक की कहानी को दिखाया गया। जिसमें बचपन से वो कितनी समझदार, संस्कारी और शिव भक्त थी, जिससे प्रभावित होकर मल्हारराव ने उन्हें अपने पुत्र खंडेराव के लिए पुत्रवधू के रूप में चुना। खंडेराव द्वारा परेशान किये जाने के बावजूद अहिल्या कभी अपने भक्ति मार्ग एवं परिवार के कर्तव्यों से विमुख नहीं हुई। मल्हारराव से राज्य शासन का कार्य और युद्ध कौशल सीखा। पति की मृत्यु के बाद जब सती होने से उन्हें पितातुल्य ससुर ने रोक लिया तो सारा ऐश्वर्य त्याग कर तपस्वीनी के रुप में जीवन बिताया। ससुर और बेटे की मृत्यु के बाद जब शासनभार संभाला तब उनके सामने बड़ी चुनौती थी राज्य में फैली अराजकता को खत्म करना। राज्य से बेरोजगारी दूर करना, तब उन्होंने भारत वर्ष में ना केवल मंदिरों का बल्कि मस्जिदों और मजारों का भी जीर्णाेद्धार करवाया, प्याऊ खुलवाये, धर्मशालाओं का निर्माण करवाया, कुएं खुदवाये, मार्ग बनवाये, जिससे लोगों को रोजगार मिला, बुनकरों को प्रशिक्षण दिलवाया, जिससे व्यापार बढ़ा। अहिल्याबाई का मानना था कि धार्मिक स्थल एकता के सूत्र होते हैं। इन सब कार्यों के दौरान उन्हें आंतरिक विद्रोह का सामना भी करना पड़ा। जिसे उन्होंने ने अपनी कुशल राजनितिज्ञ समझ से हल किया, बाहरी दुश्मनों का दमन अपने युद्ध कौशल से किया। जब उनके दामाद की मृत्यु हुई तो बेटी मुक्ताबाई को सती होने से रोकने के उन्होंने बहुत प्रयास किए लेकिन रोक ना सकी, इस बात का उन्हें सदैव दुख रहा। इस नाटक के माध्यम से अहिल्या के अहिल्याबाई से देवी बनने की कहानी को प्रस्तुत किया गया है।

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