नीमच। जावद उपखण्ड अंतर्गत स्थित 60 वर्ष पुराने मोरवन बांध से छोड़ी जाने वाली नहर से जावद क्षेत्र के 26 गांव की खेती सिंचित होती है। मोरवन ग्राम,जावद नगर व सरवानिया महाराज की पेयजल आपूर्ति भी मोरवन बांध से होती है। मोरवन बांध की लगभग बीस किलोमीटर लंबी सिंचाई नहर जगह जगह से क्षतिग्रस्त हो गई है। इस कारण से नहर में बांध से खेती की सिंचाई के लिए छोड़े गए पानी का एक चौथाई जल रास्ते मे व्यर्थ बह जाता है। इतनी जल राशि खेतो को नहीं मिल पाती है।
उक्त जानकारी डा पृथ्वीसिंह वर्मा ने देते हुए बताया कि लंबे समय बांध की नहर क्षतिग्रस्त हो चुकी है। सिंचाई विभाग नहर से व्यर्थ बह जाने वाले पानी को बचाने का कोई प्रयास नहीं कर रहा है। डॉ वर्मा ने कहा कि यदि बांध की नहर का पक्का निर्माण करवा दिया जाए तो जल का सदुपयोग सिंचाई के लिए किया जा सकता है।
बांध की नहर से 26 गांवों में दो हजार हेक्टेयर भूमि नहर से सिंचित की जाती हैं। डॉ वर्मा ने मोरवन बांध स्थित बगीचे की हो रही दुर्दशा के बारे में बताया कि बांध परिसर में 30 वर्ष पूर्व सार्वजनिक उद्यान विकसित किया गया था। बगीचे में बच्चों के मनोरंजन के लिए कई उपकरण स्थापित किये गए थे। जावद नीमच व मनासा क्षेत्र के लोग पिकनिक मनाने बांध के उद्यान में आते थे। आज देखरेख के अभाव में बांध का बगीचा उजड़ गया है। बांध के समीप नाले का पानी रोक कर वोटिंग भी चालू कर दी गई थी।
मत्स्य विभाग ने मत्स्य के बीज तैयार करने के लिए दो पौंड बनवाए गए थे। डॉ वर्मा ने कहा कि अनदेखी व उपेक्षा का शिकार हुआ बांध का विकसित सुंदर मनोरंजक उद्यान ( पिकनिक प्वाइंट ) पूरी तरह उजाड़ हो गया है। फल फूल के पौधे भी नष्ट हो गए है। डॉ वर्मा ने मांग की है कि बांध की नहर का पक्का निर्माण कर जल क्षति को अविलंब रोका जाए। पर्यावरण सुरक्षा की दृष्टि से बांध के बगीचे को पुनः विकसित किया जाए,ताकि पर्यटन प्रेमी जनता फिर से मोरवन बांध पर आना शुरू कर सके।