चित्तौड़गढ़। नगर परिषद चित्तौडगढ में 15 हजार स्ट्रीट लाईट पोल किराया, नगर परिषद भूमि पर लगे हुए मोबाईल टावर, किराया, अण्डर ग्राउण्ड, फाइबर केबल डालने पर रोड कटिंग व पेनहाल/चेम्बर किराया आदि मे राज्य सरकार के आदेशानुसार एवं ऑडिट रिपोर्ट अनुसार विभिन्न मोबाईल इन्टरनेट टीवी चेनल प्रदाता कम्पनीयों के स्थानीय संचालकों मे लगभग 30 करोड़ रूपये राजस्व की बकाया राशि वसूलने एवं बकाया राशि जमा नही कराने पर परिषद क्षेत्र मे स्ट्रीट लाईट पोल से केबल हटाने हेतु आज भाजपा के पूर्व पार्षद एवं भाजपा कार्यकर्ताओ ने मुख्यमंत्री भजनलाल एवं स्वायत्त शासन मंत्री झाबरसिंह खररा को पत्र लिखा एवं नगर परिषद आयुक्त जितेन्द्र मीणा से मिलकर अतिशीघ्र वसूली की मांग की।
यह जानकारी देते पूर्व पार्षद छोटूसिंह शेखावत ने बताया कि पत्र में कांग्रेस के पूर्व सभापति परिवार द्वारा संचालित टीवी चौनल व इन्टरनेट प्रदाता कम्पनी पिछले 10 वर्षाे से 13-14 हजार स्ट्रीट लाईट पोल पर केबल बिछा रखी है एवं आज दिन तक एक रूपया भी किराया नही दिया और आज दिन तक ना ही एनओसी ली। इस हिसाब से इस स्थानीय संचालक मे बकाया लगभग 10 करोड रूपये अतिशीघ्र वसुल किये जावे यदि वसूली नही होती है तो केबल हटाने की मांग की।
उन्होंने बताया कि राज्य सरकार द्वारा समय समय पर आदेश जारी कर स्ट्रीट लाईट पोल किराया लोकल बोडी स्थानीय निकाय द्वारा वसूल करने के आदेश दे रखे है। विस्तृत आदेश दिनांक 6 फरवरी 2017 को दिया जिसमें स्पष्ट उल्लेख है कि स्ट्रीट लाईट पोल किराया स्थानीय निकाय वसूल करेगी एवं पोल का प्रतिवर्ष किराया 1500 होगा जो 2023 मे 1000 प्रति पोल प्रतिवर्ष कर दिया गया।
इसी तरह से इंडस कम्पनी द्वारा मोबाईल टावर नगर परिषद की भूमि पर लगाये गये है जिनका भी कई वर्षाे से किराया नही आया एवं बिना स्वीकृति के मोबाइल टावर लगा दिये गये।
राजस्व वसुली नही होने का मुख्य कारण अवैध वसूली एवं परिषद के नेता व अधिकारियो की मिलीभगत है।
पत्र मे मांग की गई कि 30 करोड राजस्व की वसूली अतिशीघ्र की जाये। ये आरोप लगाया गया कि पिछले 5 वर्ष में परिषद मे भ्रष्टाचार चरम पर था एवं वार्डाे मे विकास कार्य नही हुए और परिषद पर 25 करोड का कर्ज हो गया।
अब राजस्व वसूली होने से प्रत्येक वार्ड मे विकास कार्य हो सकेगें।
पत्र मे सरकार के आदेशों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि स्ट्रीट लाईट पोल का किराया स्थानीय निकाय ही वसुल करेगी। राज्य सरकार के आदेशों के उपर ना तो परिषद है ना ही विद्युत विभाग और ना ही कोई कम्पनी। ऑडिट रिपोर्ट 2022-23 एवं जनवरी 2025 मे स्पष्ट है कि 4 कम्पनीयों मे ही 15 करोड रूपये से अधिक राशि बकाया है।
पत्र सौपने वालो मे पूर्व पार्षद छोटूसिंह शेखावत, रामचन्द्र गुर्जर, शिव शर्मा, चेतन खत्री, हरीश गुरनानी, यशवन्त पुरी गोस्वामी, चन्द्रसिंह शेखावत, मुकेश गावरी, कैलाश , सुनील शर्मा, शंकरलाल कीर, नारायण गुर्जर, अली असगर, अभिमन्यु समदानी, नीरज सुखवाल, आशीष शर्मा, ओमप्रकाश जोशी, भूपेन्द्र सिंह, दीपक , हरिराज सिंह, अम्बालाल, देवकिशन आदि उपस्थित रहे।