अफीम नीति 2025-26 जारी होने के बाद भी अफीम किसानों में आक्रोश है किसान संगठन अपनी मांगो को लेकर अब भी लड़ रह रहे है और ज्ञापन पर ज्ञापन सौंप रहे है वही अफीम किसान संगठन ने एक पत्र एक बार फिर वित्तमंत्री पंकज चौधरी के नाम सौंपा है जिसमें कहा गया है कि वित्त राज्य मंत्री पंकज जी चौधरी साहब (राजस्व) भारत सरकार नई दिल्ली आवास पर अफीम खेती की नीति 2025 -26 में निम्नांकित व्यावहारिक संशोधन को जो न्यायसंगत संशोधन के लिए किसानों का प्रतिनिधि मंडल 20 सितंबर 2025 को दिल्ली पहुंचा और निम्नांकित सुझाव प्रेषत किया....
1- सरकार के द्वारा पुराने जो भी लाइसेंस काटे गए हैं (आजादी से आज तक) वह सभी किसानों को परंपरागत अफीम खेती के 10-10 आरी के एक समान अफीम पट्टटे दिए जाएं...
2- सरकार के द्वारा किसानों के ऊपर थोपी गई सीपीएस पद्धति में 5-5 आरी के अफीम पट्टे दिए जो बिल्कुल भी अन्याय पूर्ण और अव्यावहारिक है सीपीएस से जुड़े सभी किसानों को भी परंपरागत अफीम खेती के 10-10 आरी के अफीम पट्टटे दिए जाए । यदि नहीं तो पिछले वर्षों का सीपीएस पद्धति क्या उत्पादन रहा उसका रिजल्ट किसानों को बताया जाए.. ????? सीपीएस पद्धति बढ़िया और देना जरूरी है ....तो अफीम खेती से जुड़े गांवों के उन किसानों के परिजनों को दिए जाए जिन किसानों के परीजनो ने जीवन में कभी भी अफीम खेती नहीं की है ...लेकिन जिन किसानों ने अफीम खेती की है आजादी से आज तक उन सब किसानों को तो परंपरागत अफीम खेती के लुनी- चीरनी के अफीम पट्टे ही दिया जाए।
3- अफीम का मूल्य बढ़ाया जाए
4- 8/29 धारा को बिल्कुल खत्म किया जाए क्योंकि इसमें निर्दोष किसानों को फंसाकर उनसे लाखों रुपए लूटे जा रहे है
5- परंपरागत अफीम का डोडा- चूरा सरकार उचित मूल्य देकर ही किसानों से खरीदे।
6- सरकार के द्वारा अफीम फैक्ट्रीयों का निजीकरण बंद किया जाए
7- नीमच व गाजीपुर अफीम फैक्ट्री को अपडेट किया जाए।
प्रतिनिधि मंडल- सीफा के डायरेक्टर कोटी रेड्डी कोरडीनेटर कैशव आर्य के साथ संरक्षक मांगीलाल मेघवाल बिलोट राष्ट्रीय अध्यक्ष भोपाल सिंह चौहान डूंगला तहसील अध्यक्ष अशोक धाकड़ सचिव सुरेश जटिया रामचंद्र डांगी कन्हैयालाल राठौड़ दीपक थे वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी को अफीम किसानों के दर्द सुनने का समय दिया व परंपरागत अफीम खेती को बचाने के लिए किसानों की आर्थिक आजादी के लिए मरीजों को सस्ती दवा सुलभ हो सके और मेक इन इंडिया मेड बाय किसान सार्थक सिद्ध होने के लिए सहज चर्चा के बाद समिति के सदस्यों ने अफीम नीति में संशोधन करने का निवेदन किया।