मंदसौर। राजीव गांधी शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, मंदसौर (प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस) में इतिहास विभाग द्वारा विशेष व्याख्यान एवं स्वच्छता शपथ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का विषय था — "स्वदेशी वस्तुओं का प्रयोग : सांस्कृतिक विरासत और आर्थिक सशक्तिकरण"।
कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. जे. एस. दुबे ने की। उन्होंने अपने संबोधन में विद्यार्थियों को स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि महात्मा गांधी ने गुलामी की जंजीरों को तोड़कर मां भारती को आजाद कराया, अब हमारा कर्तव्य है कि हम स्वच्छता और स्वदेशी के माध्यम से भारत माता की सच्ची सेवा करें। उन्होंने विद्यार्थियों को स्वच्छता की शपथ भी दिलाई और कहा कि स्वच्छता की दिशा में बढ़ाया गया प्रत्येक कदम पूरे देश को स्वच्छ बनाने में सहायक होगा।
इतिहास विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. उषा अग्रवाल ने कहा कि प्राचीन भारत आत्मनिर्भरता का प्रतीक था। भारतीय वस्त्र और शिल्पकला विदेशों में प्रसिद्ध थे। मंदसौर के रेशमी वस्त्र भी विदेशों तक जाते थे। आज आवश्यकता है कि हम विदेशी उत्पादों के स्थान पर भारतीय वस्तुएं, तकनीक और संसाधनों को प्राथमिकता दें।
कार्यक्रम में इतिहास विभाग के शोधार्थी जितेंद्र गवारिया ने एक रोचक पी.पी.टी. प्रेजेंटेशन प्रस्तुत किया, जिसमें स्वदेशी की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, भारतीय व्यापार का स्वर्णिम इतिहास, गांधी जी की आत्मनिर्भरता की राह, और वर्तमान में भारत सरकार के “आत्मनिर्भर भारत” तथा “वोकल फॉर लोकल” अभियानों की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने अमूल, पतंजलि, फेब इंडिया जैसे सफल स्वदेशी ब्रांड्स की प्रेरक कहानियां भी साझा कीं।
कार्यक्रम का संचालन इतिहास विभाग के डॉ. शिवकुमार पांडे ने किया तथा आभार प्रदर्शन भी उन्हीं के द्वारा किया गया। इस अवसर पर डॉ. राजेश सकवार, शबनम खान, शोधार्थी सुधांशु पांडे सहित बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।