भीलवाड़ा। राजस्थान साहित्य अकादमी, विनायक विद्यापीठ एवं ‘बालवाटिका’ मासिक के संयुक्त तत्वावधान में दो दिवसीय राष्ट्रीय बालसाहित्य संगोष्ठी एवं सम्मान समारोह विनायक विद्यापीठ में बड़ी भव्यतापूर्वक संपन्न हुआ। इस अखिल भारतीय संगोष्ठी का केंद्रीय विषय रहा, ‘भारतीय ज्ञान परंपरा और हमारा दायित्व’। दिनांक ०४ और ०५ अक्टूबर को आयोजित इस समारोह के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि लोकप्रिय सांसद दामोदर अग्रवाल ने कहा कि आज भारतीय ज्ञान परंपरा और संस्कृति का संरक्षण हम सबकी प्राथमिकता में होना चाहिए। विश्व के अन्य देशों की नकल करके हम अपनी सभ्यता और संस्कृति को भुलाने का ही काम कर रहे हैं। उन्होंने वर्तमान केंद्रीय और राज्य सरकार के इस दृष्टि से किए जाने वाले कार्यों की ओर भी ध्यान आकृष्ट किया और इस बात पर जोर दिया कि ‘राष्ट्र सबसे पहले है’ यह भाव जब हम सब देशवासियों में होगा तो भारत को पुन: जगद्गुरु बनने में देर नहीं लगेगी। इस सत्र के मुख्यवक्ता उदयपुर से आए भारतविद् डॉ. कृष्ण जुगनू ने कहा कि विश्व में हमारी ज्ञान परंपराश् जितनी समृद्ध है, उतनी किसी भी देश की नहीं है। उन्होंने कहा कि यहाँ तो हर विषय पर शास्त्रों की रचनाएँ हुई हैं और सैंकड़ों प्राचीन शास्त्रों का संपादन पुनर्लेखन और अनुवाद का कार्य स्वयं मैंने किया है। इतनी समृद्ध ज्ञानपरंपरा से हमारा उदासीन होते जाना निश्चित ही बहुत बड़़ी भूल है। कार्यक्रम के अध्यक्ष चित्तौडग़ढ़ से आए शिक्षाविद् एवं वरिष्ठ बालसाहित्य रचनाकार शिव मृदुल ने कहा कि इस परंपरा को हम आज बालसाहित्य के माध्यम से ही सुरक्षित रख सकते हैं। बालकों को बचपन से ही पाठ्यक्रम के माध्यम से इस ओर जागरूक करेंगे तभी हम अपनी ज्ञान परंपरा को सुरक्षित रख पाएँगे। आरंभ में विनायक विद्यापीठ के निदेशक डॉ. देवेंद्र कुमावत ने अपने स्वागत उद्बोधन से सभी अतिथियों एवं सहभागियों का स्वागत अभिनंदन किया, वहीं कार्यक्रम संयोजक एवं ‘बालवाटिका’ के संपादक डॉ. भैरूँलाल गर्ग ने ‘बालवाटिका’ एवं इस समारोह के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए ऐसे कार्यक्रमों की उपादेयता पर प्रकाश डाला। इस सत्र का संचालन वरिष्ठ बालसाहित्य रचनाकार रेखा लोढ़ा ‘स्मित’ ने किया।
प्रथम संगोष्ठी सत्र के विषय- ‘हमारी ज्ञान परंपरा : शिक्षा और बालसाहित्य के अंतर्संबंध’ पर वरिष्ठ बालसाहित्य रचनाकार एवं शिक्षाविद् कोटा के भगवती प्रसाद गौतम ने पत्रवाचन किया। इस संगोष्ठी में चित्रेश, रमेशचंद्र पंत, डॉ. रवींद्र कुमार उपाध्याय आदि ने चर्चा में प्रमुख भूमिका निभाई। इस सत्र का संचालन डॉ. सत्यनारायण ‘सत्य’ ने किया। दूसरे सत्र में देवपुत्र के संपादक, इंदौर से आए गोपाल माहेश्वरी ने ‘भारतीय ज्ञान परंपरा : छोटी-छोटी मोटी बातें’ विषयक अपना पत्रवाचन किया तथा उत्तराखंड के महावीर रवाँल्टा, भोपाल की डॉ. लता अग्रवाल, नीना सिंह सोलंकी आदि ने चर्चा में प्रमुखता से अपनी भूमिका निभाई। इस सत्र का संचालन प्रोफेसर डॉ. अवधेश जोहरी ने किया।
बालकाव्य गोष्ठी में पं. नंदकिशोर निर्झर के संचालन और भगवती प्रसाद गौतम की अध्यक्षता एवं भंवरलाल शर्मा प्रेम के मुख्य आतिथ्य में पूरे देश से आए रचनाकारों ने अपनी बालकविताएँ पढ़ीं। विनायक विद्यापीठ के खुले प्राकृतिक परिवेश में संपन्न यह काव्य संध्या सचमुच अविस्मरणीय रही।
दूसरे दिन ‘हिंदी बालसाहित्य : दशा, दिशा एवं संभावना’ विषय पर उदयपुर से आयीं वरिष्ठ बालसाहित्य रचनाकार आशा पांडेय ‘ओझा’ ने पत्रवाचन किया तथा डॉ. सूर्यनाथ सिंह (दिल्ली), विष्णु शर्मा हरिहर (कोटा), विमला रस्तोगी (दिल्ली) ने चर्चा में मुख्य भूमिका निभाई। इस सत्र का संचालन बालसाहित्य रचनाकार यशपाल शर्मा ‘यशस्वी’ ने किया।
पाँचवें और अंतिम सत्र की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ पत्रकार एवं चिंतक राजेंद्र ओस्तवाल ने भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण पर प्रकाश डालते हुए इस बात पर जोर दिया कि आज हमें एकात्म परिवार की प्रतिष्ठा करनी होगी, तभी हमारी संस्कृति भी सुरक्षित रह सकेगी। मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए प्रखर चिंतक और वक्ता लक्ष्मीनारायण डाड ने आज समाज में फैल रही नकारात्मकता की ओर संकेत करते हुए सभी का ध्यान इस ओर आकृष्ट किया कि बालसाहित्य ही बालक को एक अच्छा नागरिक बना सकता है, अत: बालसाहित्य से बच्चों को जोडऩे का प्रयास अभिभावकों को गंभीरता से करना चाहिए। विशिष्ट अतिथि डॉ. श्यामसुंदर भट्ट, श्याम प्रकाश देवपुरा एवं बाल प्रहरी (अल्मोड़ा) के संपादक उदय किरोला एवं वैद्य हँसराज चौधरी ने भी केंद्रीय विषय पर प्रकाश डाला और भारतीय संस्कृति के संरक्षण को आज सबसे बड़ी चुनौती बताया। इसी सत्र में मंचस्थ अतिथियों द्वारा आनंद प्रकाश जैन शिखर सम्मान से डॉ. हूँदराज बलवाणी, कन्हैयालाल मत्त सम्मान से रमेशचंद्र पंत,वैभव कालरा स्म़ृति सम्मान से डॉ. सूर्यनाथसिंह, गंगा दुलारी शुक्ला स्मृति सम्मान से विमला रस्तोगी तथा अपने बालसाहित्य में उल्लेखनीय योगदान के लिए देशभर से महावीर रवाँल्टा (उ.खं.), पवन पहाडिय़ा डेह (राज.), प्रतिभा शर्मा (हि.प्र.), विष्णु शर्मा ‘हरिहर’ (कोटा-राज.), विमला नांगला (केकड़ी), गोपाल माहेश्वरी (म.प्र.), श्यामनारायण श्रीवास्तव (छ.ग.), लता अग्रवाल (म.प्र.), पवन वर्मा (बनारस), श्यासुंदर तिवाड़ी (भीलवाड़ा) एवं कीर्ति शर्मा (नोहर-राज.) को सम्मानित किया गया। संयोजक डॉ. भैरूँलाल गर्ग ने सहभागिता हेतु समस्त रचनाकारों और अतिथियों के प्रति आभार जताया, वहीं विनायक विद्यापीठ की ओर से उपनिदेशक यश कुमावत ने सभी के प्रति धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि आप सभी से इसी तरह आगे भी इस समारोह को सफल बनाने का हमारा आत्मीय अनुरोध है। इस सत्र का भी सफल एवं गरिमामय संचालन वरिष्ठ बालसाहित्य रचनाकार रेखा लोढ़ा ‘स्मित’ ने किया।