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October 10, 2025, 3:32 pm
KAVITA : आज करवा चौथ स्पेशल- चांद के दीदार पर शायरों के अल्फ़ाज़ कवि समीर तिवारी की कविता, सुनो चन्द्रमा, पढ़े

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सुनो चन्द्रमा ! धैर्य न खोना प्रियसी का श्रृंगार देखकर। देखो तुम लज्जित मत होना यौवन का उपहार देखकर।

हो सकता है देख के उनको चलते चलते रुक जाओ। या गजरे की गंध से विचलित होकर थोड़ा झुक जाओ। चूड़ी, कंगन, पायल के तुम मधुरिम स्वर में खो जाओ। या फिर जब वो तुमकों देखें, तुम उनके ही हो जाओ।

देखो तुम अवसाद न करना गहनों का अधिकार देखकर। सुनो चन्द्रमा ! धैर्य न खोना प्रियसी का श्रृंगार देखकर।

संभव है कि उनके सम्मुख तुम्हें चांदनी फीकी लागे। उनकी मीठी बोली सुनकर सबकी बोली तीखी लागे। उन अधरों की देख लालिमा मद्धम सूर्य की लाली लागे। या कजरारी आँखें उनकी तुम्हें रात से काली लागे।

देखो मन को क्षुब्ध न करना ईश्वर का उपकार देखकर। सुनो चन्द्रमा ! धैर्य न खोना प्रियसी का श्रृंगार देखकर।

जब उपवासी रस्म रीति को साथ निभायें हम दोनो। सात वचन वाली कसमें जब फिर से खायें हम दोनो। नयनों से जब भाव पत्र को करें प्रवाहित हम दोनो। या इक दूजे की बाहों में रहें समाहित हम दोनो।

देखो तुम ईर्ष्या मत करना हम दोनो का प्यार देखकर सुनो चंद्रमा ! धैर्य न खोना प्रियसी का श्रृंगार देखकर।

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