नीमच। लोक आस्था और सूर्य उपासना का महापर्व छठ पूजा इस बार भी नीमच की ग्वालटोली स्थित पंडित दीनदयाल वाटिका में पूरे श्रद्धाभाव और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। पूर्वांचल समाज द्वारा आयोजित यह पर्व पिछले 40 वर्षों से निरंतर मनाया जा रहा है और अब यह ग्वालटोली की पहचान और परंपरा का प्रतीक बन चुका है।
सोमवार को श्रद्धालु महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में जल में खड़े होकर डूबते सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया, वहीं मंगलवार की सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत का समापन होगा। चार दिवसीय इस महापर्व की शुरुआत ‘नहाय-खाय’ से हुई, इसके बाद ‘खरना’ और सोमवार को ‘संध्या अर्घ्य’ का आयोजन हुआ।
इस अवसर पर परिसर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी। छठ घाट पर सफाई, सजावट, प्रकाश व्यवस्था और सुरक्षा के पुख्ता इंतज़ाम किए गए थे। वातावरण भक्ति गीतों और आतिशबाज़ी से गुंजायमान रहा। श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद वितरण और सुविधा केंद्र भी बनाए गए।
चार दशक पुरानी यह परंपरा आज भी लोक संस्कृति, सूर्य उपासना और सामूहिक एकता का प्रतीक बनी हुई है। डूबते और उगते सूर्य को दिया गया अर्घ्य न केवल आस्था का प्रतीक है, बल्कि मनुष्य और प्रकृति के अटूट संबंध का जीवंत संदेश भी देता है।