ग्वालियर। कतर की जेल में बंद पूर्व भारतीय नौसेना अधिकारी कमांडर पूर्णेन्दु तिवारी की रिहाई को लेकर अब ग्वालियर से एक बार फिर आवाज उठी है। कमांडर पूर्णेन्दु तिवारी की बहन मीतू भार्गव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्रालय से भाई को भारत वापस लाने की अपील की है। मीतू का दावा है कि कतर में बंद आठ पूर्व भारतीय नौसेना अधिकारियों में से सात भारत लौट चुके हैं, लेकिन उनके भाई को अब तक वापस नहीं लाया जा सका है। 87 साल की मां बेटे की राह देख रही हैं। वहीं परिवार का दावा है कि कमांडर पूर्णेन्दु तिवारी कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं।
मां अब भी देख रही बेटे की राह
ग्वालियर से सामने आई ये अपील एक ऐसे परिवार की है, जो लंबे वक्त से अपने बेटे की घर वापसी का इंतजार कर रहा है। नाम है कमांडर पूर्णेन्दु तिवारी, पूर्व भारतीय नौसेना अधिकारी और परिवार के मुताबिक, कतर की नौसेना को ट्रेनिंग देने के लिए दोहा गए थे। मीतू भार्गव ने 3 अगस्त को सोशल मीडिया पर पोस्ट कर सरकार से सवाल किया, जब आठ पूर्व भारतीय नौसेना अधिकारियों में से सात भारत लौट चुके हैं, तो उनके भाई पूर्णेन्दु तिवारी को अब तक क्यों नहीं लौटाया गया?
परिवार ने लगाए ये आरोप
मीतू भार्गव के मुताबिक, उनके भाई को कतर में एक मामले में हिरासत में लिया गया था। परिवार का दावा है कि बाद में उन्हें राहत मिली, लेकिन इसके बावजूद उन्हें दोहा से भारत लौटने की अनुमति नहीं दी गई। मीतू का कहना है कि उनके भाई को पहले बताया गया था कि कुछ औपचारिकताएं पूरी होने के बाद उन्हें भी भारत भेज दिया जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। परिवार का आरोप है कि बाद में उन्हें दोबारा पूछताछ के सिलसिले में हिरासत में लिया गया और उन पर यात्रा प्रतिबंध लगा दिया गया।
स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे कमांडर
मीतू भार्गव ने अपनी पोस्ट में कमांडर पूर्णेन्दु तिवारी की उम्र 67 साल बताई है। साथ ही परिवार की ओर से दावा किया गया है कि वह कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं। पोस्ट में यह भी दावा किया गया है कि पहले लंबे समय तक एकांत कारावास में रहने के कारण उन्हें PTSD यानी पोस्ट ट्रॉमैटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर की समस्या हुई। मीतू का कहना है कि जेल में बिताया जा रहा हर अतिरिक्त दिन उनकी शारीरिक और मानसिक स्थिति पर असर डाल रहा है।
विदेश मंत्रालय से किए ये सवाल
कमांडर की बहन ने विदेश मंत्रालय से भी सवाल किए हैं। उनका सवाल है कि जब बाकी सात पूर्व नौसेना अधिकारी भारत लौट आए, तो कमांडर पूर्णेन्दु तिवारी को दोहा में ही क्यों रोक दिया गया? परिवार की ओर से यह भी दावा किया गया है कि एक अलग मामले में कतर की अदालतों ने कमांडर तिवारी को दोषी नहीं माना था। मीतू ने अपनी पोस्ट में इसी आधार पर उनके लगातार जेल में रहने को लेकर सवाल उठाए हैं।
राष्ट्रपति की ओर से हो चुके हैं सम्मानित
एक तरफ दोहा की जेल में बंद 67 साल के कमांडर पूर्णेन्दु तिवारी, तो दूसरी तरफ ग्वालियर में 87 साल की उनकी बुजुर्ग मां…मीतू भार्गव के मुताबिक, मां की तबीयत भी ठीक नहीं रहती और वह रोज बेटे की वापसी का इंतजार करती हैं। परिवार की चिंता सिर्फ कमांडर तिवारी की रिहाई तक सीमित नहीं है। बल्कि उनकी उम्र और स्वास्थ्य को लेकर भी परिवार लगातार सरकार से हस्तक्षेप की मांग कर रहा है। परिवार के मुताबिक, कमांडर पूर्णेन्दु तिवारी ने भारतीय नौसेना में लंबे समय तक सेवाएं दीं। मीतू भार्गव ने अपनी पोस्ट में यह भी लिखा है कि उनके भाई को राष्ट्रपति की ओर से प्रवासी भारतीय सम्मान से सम्मानित किया जा चुका है। अब वही परिवार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, विदेश मंत्री और भारतीय नौसेना से कमांडर तिवारी की घर वापसी के लिए मदद की गुहार लगा रहा है।
मीतू भार्गव की अपील अब सिर्फ एक परिवार की गुहार नहीं, बल्कि कमांडर पूर्णेन्दु तिवारी की उम्र, स्वास्थ्य और लंबे समय से चल रही हिरासत को लेकर कई सवाल खड़े करती है। परिवार का कहना है कि सात पूर्व नौसेना अधिकारी भारत लौट चुके हैं, लेकिन आठवें अधिकारी की घर वापसी अब भी बाकी है। ऐसे में 87 साल की मां बेटे का इंतजार कर रही हैं और बहन की प्रधानमंत्री से गुहार लगा रही है की “कमांडर पूर्णेन्दु तिवारी को अब भारत वापस लाया जाए, इससे पहले कि बहुत देर हो जाए।