नीमच। मोरवन डेम क्षेत्र की गोचर भूमि पर प्रस्तावित टेक्सटाइल मिल निर्माण को लेकर जारी आंदोलन में रविवार को नया मोड़ आया, जब किसान नेता पूरणमल अहीर ने पत्रकार वार्ता में प्रशासन और स्थानीय विधायक ओमप्रकाश सकलेचा पर गंभीर आरोप लगाए।
अहीर ने आरोप लगाया कि जिस भूमि पर मिल का निर्माण हो रहा है, वह गोचर भूमि है और इसके आसपास पेयजल स्रोत, ग्राम पंचायत भवन, स्कूल, छात्रावास तथा गौशाला स्थित हैं। ऐसे में यह क्षेत्र औद्योगिक गतिविधियों के लिए कतई उपयुक्त नहीं है। उन्होंने कहा कि मिल संचालन से भूजल और पर्यावरण पर गंभीर दुष्प्रभाव पड़ने की आशंका है।
किसान नेता ने बताया कि प्रस्तावित स्थल के समीप स्थित डैम से जावद और सरवानिया नगर पंचायतों की लगभग 37 हजार की आबादी तथा 30 से अधिक गांवों की सिंचाई व्यवस्था निर्भर है। उनका दावा है कि टेक्सटाइल प्रोसेसिंग में प्रति मीटर कपड़े पर 50 से 150 लीटर पानी की खपत होती है, जिससे रासायनिक प्रदूषण का खतरा बढ़ सकता है।
पत्रकारों को संबोधित करते हुए अहीर ने आरोप लगाया कि 3 नवंबर को जब किसान शांतिपूर्वक ज्ञापन देने जा रहे थे, तब प्रशासन ने रास्ता अवरुद्ध कर जाम की स्थिति स्वयं उत्पन्न की और बाद में उसी आधार पर किसानों पर झूठे प्रकरण दर्ज कर दिए। उन्होंने यह भी कहा कि आंदोलन को हिंसक दिखाने के लिए विधायक समर्थकों द्वारा पत्थरबाज़ी करवाई गई, ताकि प्रशासन को कठोर कार्रवाई का आधार मिल सके।
अहीर ने आगे आरोप लगाया कि विधायक और उनके सहयोगियों द्वारा डैम क्षेत्र से लगभग 5,000 ट्रॉली पत्थर बिना अनुमति निकाले गए और मंदिर की 100 बीघा भूमि पर अवैध कब्जा कर फर्जी नामांतरण कराए गए हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि ग्रामीण रोजगार या उद्योग का विरोध नहीं कर रहे, बल्कि केवल प्रस्तावित स्थल के चयन का विरोध कर रहे हैं क्योंकि मिल जलस्रोत और गोचर भूमि के बिलकुल निकट बनाई जा रही है। अंत में अहीर ने जनता से शांतिपूर्ण और सत्य आधारित आंदोलन जारी रखने की अपील की।