भोपाल। मध्य प्रदेश में मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर सियासी गलियारे में हलचल तेज हो गई है। राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने संकेत दिए थे कि मंत्रियों के दो साल के कार्यकाल का रिव्यू किया जाएगा और उनके प्रदर्शन का आकलन तैयार किया जाएगा। अब सूत्रों की मानें तो मुख्यमंत्री ने मंत्रियों के परफॉर्मेंस की रिपोर्ट तैयार कर केंद्रीय नेतृत्व को भेज दी है। वर्तमान में मंत्रियों के प्रभार वाले जिलों की समीक्षा की जा रही है और विधायकों का भी रिपोर्ट कार्ड तैयार किया जा रहा है।

कामकाज के प्रदर्शन पर आधारित होगी स्क्रिप्ट-
राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारे में इस कवायद को लेकर चर्चा है कि मंत्रिमंडल विस्तार की स्क्रिप्ट मंत्री और विधायकों के कामकाज के प्रदर्शन पर आधारित होगी। यदि मध्य प्रदेश में गुजरात मॉडल अपनाया गया, तो कई वरिष्ठ विधायकों को दोबारा मंत्री बनने का अवसर मिल सकता है, जबकि कुछ सीनियर मंत्रियों को नई जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है।

केंद्रीय नेतृत्व और नए राष्ट्रीय अध्यक्ष की भूमिका-
राजनीतिक सूत्रों के अनुसार केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह पहले ही बता चुके हैं कि बिहार विधानसभा चुनाव के बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष की नियुक्ति होगी। नए राष्ट्रीय अध्यक्ष की टीम में मध्य प्रदेश से सीनियर नेताओं को शामिल किया जा सकता है। इस स्थिति के स्पष्ट होने के बाद ही मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मंत्रिमंडल का अंतिम स्वरूप तय करेंगे।

मंत्रियों और विधायकों के कामकाज की समीक्षा-
मंत्रिमंडल विस्तार के लिए मुख्यमंत्री सचिवालय ने अक्टूबर के दूसरे सप्ताह में भोपाल में हुई दो दिवसीय कमिश्नर-कलेक्टर कॉन्फ्रेंस के बाद मंत्रियों के प्रदर्शन का आकलन शुरू किया। इस समीक्षा में मंत्रियों की चार प्रमुख क्षमताओं को मापा गया।

जमीनी जुड़ाव- मंत्री ने अपने प्रभार वाले जिलों के कितने गांवों में रात्रि विश्राम किया और कितनी चौपालें लगाकर जनता से सीधा संवाद किया।
जिले में सक्रियता- मंत्री हर महीने अपने प्रभार वाले जिलों का दौरा कर रहे हैं या नहीं और विकास कार्यों की समीक्षा कर रहे हैं।
संगठन से तालमेल- पार्टी के कार्यक्रमों और बैठकों में उनकी सहभागिता कैसी है, और क्या वे सरकार और संगठन के बीच सेतु का काम कर रहे हैं।
केंद्रीय अभियानों का क्रियान्वयन- केंद्र सरकार के कार्यक्रमों (जैसे विकसित भारत संकल्प यात्रा) को सफल बनाने में उनका योगदान।
विधायकों के प्रदर्शन का आकलन भी इसी तरह किया गया है। उन्हें चार साल का रोडमैप तैयार करने के निर्देश दिए गए थे, जिसमें विधायक निधि का जनकल्याण और क्षेत्रीय विकास में उपयोग का ब्यौरा शामिल है। इस रिपोर्ट को जल्द ही मुख्यमंत्री के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।

संभावित नए चेहरे और वरिष्ठ विधायकों की वापसी-
सूत्र बताते हैं कि वरिष्ठ विधायक गोपाल भार्गव और बृजेंद्र प्रताप सिंह इस बार मंत्री पद के मजबूत दावेदार हैं। पहले जातीय समीकरण और राजनीतिक समीकरणों के चलते उन्हें मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली थी, लेकिन अब उनकी वापसी की संभावनाएं हैं।

गोपाल भार्गव- गोपाल भार्गव 16वीं विधानसभा के सबसे वरिष्ठ विधायक हैं। रहली विधानसभा से 2023 में 9वीं बार जीत हासिल करने वाले भार्गव ने पिछले 45 वर्षों में चुनावी राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई है। उन्होंने उमा, गौर और शिवराज मंत्रिमंडलों में कैबिनेट मंत्री के रूप में कार्य किया है। 2018 में कांग्रेस सरकार के दौरान उन्हें नेता प्रतिपक्ष बनाया गया था। 2020 में जब शिवराज सरकार सत्ता में लौटी, तो शपथ लेने वाले 5 मंत्रियों में उनका नाम नहीं था। अब सूत्रों का कहना है कि उनकी वापसी के संकेत मिल रहे हैं।

राजनीतिक गलियारों में चर्चा का दौर जारी-
इस प्रक्रिया के पूरा होने के बाद ही मध्य प्रदेश के मंत्रिमंडल का स्वरूप तय होगा। इससे राजनीतिक गलियारे में चर्चाओं का दौर जारी है और आगामी बदलाव के लिए सभी पार्टियों के नेताओं की निगाहें मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की ओर हैं। मंत्रिमंडल विस्तार के इस कदम से न केवल प्रशासनिक कार्यकुशलता बढ़ेगी, बल्कि पार्टी संगठन और सरकार के बीच तालमेल भी और मजबूत होगा। ऐसे में आने वाले हफ्तों में मध्य प्रदेश की राजनीतिक तस्वीर में नए रंग देखने को मिल सकते हैं।
