नीमच। पूर्व विधायक डॉ. संपत स्वरूप जाजू ने मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व वाली ट्रिपल इंजन सरकार के दो वर्षीय कार्यकाल पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि जिले में इस अवधि के दौरान तथाकथित विकास और धरातल पर हुए वास्तविक विकास के बीच भारी अंतर और विरोधाभास दिखाई देता है।
डॉ. जाजू ने जारी बयान में कहा कि उज्जैन संभाग से मुख्यमंत्री बनने के बावजूद, जिनका नीमच जिले से छात्र राजनीति के समय से गहरा संबंध रहा है, उनके दो वर्षों के कार्यकाल में नीमच जिले की अपेक्षाओं की पूर्ति नहीं हो सकी। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री द्वारा की गई अधिकांश घोषणाएं धरातल पर उतर ही नहीं पाईं, जिससे वे केवल “घोषणा वीर” साबित हुए हैं।
उन्होंने कहा कि लगातार भाजपा को समर्थन देकर ट्रिपल इंजन सरकार बनाने वाले नीमच जिले को उपेक्षा का सामना करना पड़ रहा है। जिले में स्वीकृत और पात्र अधोसंरचनात्मक योजनाओं की दुर्दशा सर्वविदित है। इससे स्थानीय जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी, दायित्व निर्वहन की क्षमता और दूरदृष्टि पर बड़ा प्रश्नचिन्ह खड़ा होता है।
डॉ. जाजू ने कहा कि हाल ही में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अपने दो वर्षों के कार्यकाल की उपलब्धियों को लेकर लगभग डेढ़ घंटे की वृहद प्रेस कॉन्फ्रेंस की, जिसे प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और सोशल मीडिया में व्यापक रूप से प्रचारित किया गया। यदि नीमच जिले के संदर्भ में निष्पक्ष आकलन किया जाए, तो मुख्यमंत्री द्वारा बताई गई उपलब्धियों और घोषणाओं का कोई भी ठोस लाभ जिले को मिलता दिखाई नहीं देता।
उन्होंने उदाहरण देते हुए सवाल उठाए कि एयर एम्बुलेंस सेवा का नीमच जिले में कितने मरीजों को लाभ मिला, जनवरी 2025 में प्रस्तावित हवाई सेवा का क्या हुआ, मुख्यमंत्री सुलभ बस सेवा नीमच में अब तक क्यों शुरू नहीं हो पाई, मेडिकल कॉलेज में कितनी सीटें बढ़ीं और जिला चिकित्सालय को बेस हॉस्पिटल के रूप में पूर्ण सुविधाएं क्यों नहीं मिल पाईं।
डॉ. जाजू ने कहा कि पीएम श्री कॉलेजों में कितने व्यावसायिक पाठ्यक्रम प्रारंभ हुए और कितने विद्यार्थियों को उनका लाभ मिला, यह भी स्पष्ट नहीं है। जिले की सड़कों और हाईवे की स्थिति और बदतर हुई है। नयागांव-जावरा मार्ग पर वर्षों से चिन्हित ब्लैक स्पॉट्स पर आज तक कोई सुधार कार्य नहीं हुआ, जबकि नीमच-झालावाड़ राज्य मार्ग को फोरलेन बनाने की घोषणा 15 माह पूर्व की गई थी।
उन्होंने आरोप लगाया कि स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल, उद्योग, सड़क यातायात और हवाई सेवा से जुड़ी योजनाएं केवल कागजों तक सीमित रह गई हैं। जिले की कानून व्यवस्था जिला मुख्यालय से लेकर ग्रामीण अंचलों तक पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। अवैध गतिविधियों में लिप्त माफियाओं के हौसले बुलंद हैं और वे संगठित रूप से सक्रिय हैं।
डॉ. जाजू ने कहा कि जिले में भ्रष्टाचार चरम पर पहुंच चुका है और प्रशासन का इस पर कोई प्रभावी नियंत्रण नहीं है। उन्होंने किसानों की स्थिति को भी बदतर बताया। सोयाबीन फसल क्षति का मुआवजा और फसल बीमा योजना का लाभ किसानों को नहीं मिल पाया। यूरिया खाद की किल्लत के चलते किसान घंटों कतारों में खड़े रहने को मजबूर हैं, जिससे प्रदेश में कई किसानों की मौत तक की खबरें सामने आई हैं।
डॉ. जाजू ने कहा कि मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व में दो वर्षों की ट्रिपल इंजन सरकार के कार्यकाल में नीमच जिला हर मोर्चे पर उपेक्षा का शिकार हुआ है, जिसका खामियाजा आम जनता और किसान भुगत रहे हैं।