प्रतापगढ़। जिले के वैज्ञानिक एवं युवा उद्यमी मोहनीश बोराना ने एक बार फिर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। अपनी वैज्ञानिक विशेषज्ञता और नवाचार के दम पर मोहनीश का चयन गुजरात सरकार की प्रतिष्ठित ‘आत्मनिर्भर गुजरात फेलोशिप’ के लिए किया गया है। यह फेलोशिप विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, गुजरात सरकार द्वारा प्रदान की जाती है। इस उपलब्धि पर भारत सरकार के जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी) के अंतर्गत बीआरआईसी (BRIC-DBT) ने भी उन्हें बधाई दी है।
डीप-टेक स्टार्टअप को मिलेगी नई उड़ान-
फेलोशिप के तहत मोहनीश को एसटीपबीआई (STBI) वडोदरा में शोध एवं नवाचार की सुविधा मिलेगी। साथ ही उनके डीप-टेक स्टार्टअप के रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) के लिए रिसर्च फेलोशिप और नवाचार ग्रांट भी प्रदान की जाएगी। मोहनीश अपनी टीम के साथ ब्यूटी एवं पर्सनल केयर उद्योग में बायोटेक और नैनोटेक जैसी डीप-टेक तकनीकों के माध्यम से नवाचार पर कार्य करेंगे।
प्रतापगढ़ की जैव विविधता पर भी रहेगा फोकस-
मोहनीश पूर्व में भारत सरकार के प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार के साथ प्रधानमंत्री के विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार परिषद (पीएम-एसटीईएसी) के विभिन्न मिशनों पर कार्य कर चुके हैं, जिनमें बायोडायवर्सिटी मिशन भी शामिल है। वे प्रतापगढ़ की जैव विविधता को वैज्ञानिक रूप से वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने और क्षेत्र में बायो-इकोनॉमी विकसित करने के लिए भी प्रयासरत हैं। इस शोध परियोजना के लिए कैबिनेट मंत्री श्री हेमंत मीणा ने भी उन्हें प्रोत्साहित किया है।
संघर्ष से सफलता तक की प्रेरक यात्रा-
मोहनीश का जीवन संघर्षों से भरा रहा है। वर्ष 2013 की उत्तराखंड त्रासदी में माता-पिता को खोने के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी। छोटे भाई और दादी की जिम्मेदारी निभाते हुए उन्होंने एडिनबर्ग विश्वविद्यालय से बायो-नैनो टेक्नोलॉजी में शोध पूरा किया और ब्रिटिश सिविल सर्विस में चयनित हुए।
वैश्विक मंच पर बनाई पहचान-
मोहनीश यूके में ‘नेशनल इंडियन स्टूडेंट्स एंड एलुमनी यूनियन’ (NISAU) के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रह चुके हैं। उन्होंने ‘फेयर वीजा, फेयर चांस’ जैसे अभियानों का नेतृत्व किया तथा कोविड-19 महामारी के दौरान ‘वंदे भारत मिशन’ में हजारों भारतीय छात्रों की स्वदेश वापसी में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने यूके में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विपक्ष के नेता राहुल गांधी की मेजबानी कर प्रतापगढ़ का नाम अंतरराष्ट्रीय मंच पर रोशन किया। विज्ञान और उद्यमिता के क्षेत्र में मिली यह प्रतिष्ठित फेलोशिप मोहनीश बोराना की उपलब्धियों में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ती है।