नीमच। पूर्व पार्षद एवं नवागत शहर ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष ओम दीवान ने बघाना क्षेत्र की बदहाल सड़कों और नगरपालिका की लापरवाही को लेकर जिम्मेदार अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि बघाना क्षेत्र के साथ लगातार सौतेला व्यवहार किया जा रहा है। हालात इतने खराब हैं कि यहां न केवल कांग्रेस पार्षदों के वार्डों में, बल्कि भाजपा पार्षदों के वार्डों में भी विकास कार्य ठप पड़े हैं।
ओम दीवान ने बताया कि बघाना क्षेत्र में लगभग छह वार्ड आते हैं और सभी वार्डों की सड़कों की स्थिति जर्जर हो चुकी है। इसके बावजूद नगरपालिका के जिम्मेदार अधिकारी इस ओर गंभीर नहीं हैं। उन्होंने कहा कि क्षेत्र से भाजपा का एक पार्षद नगरपालिका में सभापति जैसे महत्वपूर्ण पद पर है, फिर भी बघाना की मूलभूत समस्याओं की अनदेखी की जा रही है।
उन्होंने बघाना की प्रमुख कन्या विद्यालय के सामने की सड़क का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि यह सड़क लंबे समय से बदहाल स्थिति में है, जिससे छात्राओं, अभिभावकों एवं स्थानीय नागरिकों को रोजाना भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बार-बार शिकायतों के बावजूद अब तक इसका स्थायी समाधान नहीं हो पाया है।
ओम दीवान ने आरोप लगाया कि भाजपा की रैली के दौरान जनता को भ्रमित करने के लिए सड़कों पर केवल दिखावटी पेंचवर्क कराया गया था, जो कुछ ही दिनों में उखड़ गया। वर्तमान में गड्ढों से भरी सड़कें, उड़ती धूल, कीचड़ और गंदगी से भरी नालियां नगर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रही हैं।
उन्होंने यह भी याद दिलाया कि भाजपा की रैली के दौरान बघाना क्षेत्र की महिलाओं ने सांसद सुधीर गुप्ता, विधायक दिलीप सिंह परिहार एवं नगरपालिका अध्यक्ष स्वाति चौपड़ा का घेराव कर अपनी समस्याएं सामने रखी थीं। उस समय विधायक द्वारा अगले दिन क्षेत्र में आकर समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिया गया था, लेकिन आज तक वे बघाना नहीं पहुंचे। वहीं नगरपालिका अध्यक्ष महिलाओं से पीछा छुड़ाकर मौके से रवाना हो गई थीं।
ओम दीवान ने कहा कि क्षेत्र के रहवासी अपनी समस्याएं लेकर पार्षदों के पास पहुंच रहे हैं, लेकिन पार्षद स्वयं इतने विवश हैं कि नगरपालिका के अधिकारी-कर्मचारी भी उनकी बातों को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। उन्होंने मांग की कि बघाना क्षेत्र की सभी सड़कों एवं नालियों का तत्काल निरीक्षण कर स्थायी सुधार कार्य कराए जाएं। साथ ही चेतावनी दी कि यदि शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो कांग्रेस को जनता के साथ मिलकर आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा।