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December 20, 2025, 6:25 pm
BIG NEWS : शासकीय/प्रायवेट कार्यालयों में आंतरिक परिवाद समिति का गठन नहीं किया तो होगी ये बड़ी कार्रवाई, भरना पड़ सकता है इतने हजार रूपए का जुर्माना, पढ़े खबर 

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मंदसौर। जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास अधिकारी बी.एल. बिश्नोई द्वारा बताया गया कि महिलाओं का कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न अधिनियम-2013 द्वारा महिलाओं को कार्यस्थल पर सुगम वातावरण, सुरक्षा प्रदान करते हुए मजबूत शिकायत तंत्र प्रावधानित किया है। अधिनियम की धारा-4 के अंतर्गत प्रत्येक नियोजक आंतरिक समिति का गठन करेगा। प्रत्येक कार्यालय (शासकीय / प्रायवेट) जहां 10 से अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं, ऐसे कार्यालय में एक आंतरिक समिति का गठन होना अनिवार्य है।

समिति के पीठासीन अधिकारी एवं सदस्यों की नियुक्ति अधिकतम तीन वर्ष के लिए होती है। तीन वर्ष पश्चात समिति का पुनर्गठन किया जाना होता है। जिले के प्रत्येक 10 से अधिक कर्मचारी कार्यरत शासकीय/ अशासकीय कार्यालय में समिति का गठन पीठासीन अधिकारी कार्यस्थल पर कार्यरत वरिष्ठ महिला कर्मचारी, वरिष्ठ महिला उपलब्ध न होने पर अन्य कार्यालय से किसी अन्य महिला को आमंत्रित किया जाएगा।

जिला कार्यक्रम अधिकारी ने समस्त अशासकीय संस्थाओं में आंतरिक समिति का गठन करें अथवा पूर्व में गठित समितियों का तीन वर्ष का कार्यकाल पूर्ण होने के पश्चात नवीन समिति का गठन कर ैीम ठव्ग् प्रोर्टल पर रजिस्‍ट्रेशन अनिवार्य रूप से करे, अन्यथा इस स्थिति में कार्यालयीन समिति का सही गठन या गठन न होने पर अधिनियम की धारा-26(1) के अनुसार 50 हजार रुपए की राशि से जुमनि से दंडित करने की कार्रवाई की जाएगी।

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