रतनगढ़। सामान्य वनमंडल नीमच अंतर्गत वन परिक्षेत्र रतनगढ़ में बुधवार को द्वितीय अनुभूति शिविर का आयोजन सब-रेंज ताल की बीट अंबा के कक्ष क्रमांक 209 में किया गया। शिविर का उद्देश्य विद्यार्थियों को प्रकृति, वन एवं वन्यप्राणी संरक्षण के प्रति जागरूक करना रहा।
शिविर में विक्रम सोनी (जिला महामंत्री), गोपालजी धाकड़ (सांसद प्रतिनिधि), ओंकारलाल धाकड़, पारस जैन (महामंत्री), कारूलाल गुर्जर (मंदिर समिति अध्यक्ष, बसदेवी माता), कमलेश कुमावत (सरपंच, अंबा), रमेश मेवंशी (पूर्व सरपंच, परलाई), प्रेमशंकर पटेल (तहसीलदार, सिंगोली), बालकृष्ण मकवाना (नायब तहसीलदार, सिंगोली) उपस्थित रहे।
वन विभाग की ओर से उपवनमंडलाधिकारी नीमच दशरथ अखंड, वन परिक्षेत्र अधिकारी रतनगढ़ पी.एल. गेहलोत, वन परिक्षेत्र अधिकारी जावद विपुल प्रभात करोरिया, परिक्षेत्र सहायक ताल बापूलाल दायणा (वनपाल), परिक्षेत्र सहायक उमर तरूण बोरीवाल (कार्यवाहक वनपाल), परिक्षेत्र सहायक बांदा अजय तोमर (कार्यवाहक वनपाल), परिक्षेत्र सहायक डीकेन अरविंद गौड़ (कार्यवाहक वनपाल) सहित वनरक्षक नयन मालवीय, निरंजन पाराशर, कु. प्रीति कन्हरिया, सदाशिव धाकड़, सतीष राठौर, राजू कबाड़िया, मोहित कुमार सोलंकी (प्रबंधक तेंदूपत्ता), प्रह्लाद सोनी, राजकुमार चौहान, बालकिशन एवं दिनेश वाचा सहित समस्त स्टाफ उपस्थित रहा।
शिविर में शासकीय विद्यालय सिंगोली के प्राचार्य राजेन्द्र जोशी, प्राचार्य राजेन्द्र कुमार प्रजापत, शिक्षकगण रेखा शर्मा, प्रशांत शर्मा, विपुल नागदा, सुमन सुधाकर, ज्ञानेन्द्र कुमार शर्मा, राघवेन्द्र शर्मा, बहादुर दरोगा एवं 126 छात्रदृछात्राएं शामिल हुए।
अनुभूति मास्टर ट्रेनर बापूलाल दायणा (वनपाल), सदाशिव धाकड़ (वनरक्षक) एवं मो. सगीर मंसूरी (वनरक्षक) द्वारा अनुभूति वर्ष 2025-26 की थीम “हम पृथ्वी के दूत” पर जानकारी दी गई। विद्यार्थियों को वन एवं वन्यप्राणी संरक्षण, जैव विविधता, नदियों का महत्व, जड़दृमृदा तंत्र, पक्षी दर्शन एवं वन्यजीवों के संकेतों की पहचान के बारे में विस्तार से बताया गया।
शिविर के दौरान विद्यार्थियों को अनुभूति किट (पुस्तिका, केप, पेन, पेंसिल) वितरित की गई। मिशन लाइफ के अंतर्गत पर्यावरण संरक्षण, खाद्य जाल, जंगल की पुकार एवं नागरिक कर्तव्यों को सरल एवं रोचक तरीकों से समझाया गया। प्लास्टिक उपयोग से होने वाले नुकसान बताए गए तथा खेलदृखेल में बिना सिले कपड़े से थैला (झोला) बनाने का प्रशिक्षण भी दिया गया।
कार्यक्रम में क्विज प्रतियोगिता, गीत गायन, बाघ नृत्य (थीम- मैं भी बाघ, हम हैं बदलाव, हम हैं धरती के दूत) आयोजित किए गए। प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को पुरस्कार प्रदान किए गए। अंत में विद्यार्थियों को अनुभूति शपथ दिलाई गई तथा समूह छायाचित्र के साथ शिविर का समापन हुआ।