नीमच। जिले के ग्राम देवरी खवासा निवासी गायत्री बाई पति विजय कारपेंटर , पशुपालन कर प्रतिमाह डेढ़ लाख रूपये कमा रही हैं। आठ वर्ष पूर्व मात्र दो पशुओं से पशुपालन प्रारंभ कर, वर्तमान में छोटे बड़े गौवंश एवं भैंस वंश की संख्या 17 हो गई है। गायत्री बाई स्वयं खेती के साथ पशुपालन का कार्य करती हैं। पशुशाला में पशुओं के चारा खाने की कुण्डियां बना रखी हैं तथा ऑटोमेटिक पानी की व्यवस्था कर रखी है ताकि कम मजदूरों से पशुओं का प्रबंधन किया जा सके।
पशुपालक गायत्री बाई बताती हैं कि उनके मन में यह बात थी, कि किस प्रकार मेरे हाथ में रोज पैसा आए, ताकि मैं अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में सहायता कर सकूँ। उन्हें इसका सबसे अच्छा साधन, पशुपालन लगा, क्योंकि खेती का फसल अवशेष पशु आहार के रूप में उपयोग किया जा सकता था जिसमें कोई अतिरिक्त खर्च नहीं आता और गोबर के खाद के उपयोग से रासायनिक खाद का खर्च भी कम हो जाता है फसल उत्पादन भी बढ़ता है। साथ ही दूध से अतिरिक्त आय भी होती है।
गायत्री बाई का कहना है कि पहले मात्र दो पशु क्रय किए, वर्तमान 17 छोटे बड़े पशु हैं जो घर पर ही वंश वृद्धि से प्राप्त हुए हैं। मादा बछड़ियाँ प्राप्त करने हेतु पशुओं को सेक्स सॉर्टेड सीमन लगवाती हैं। समय-समय पर टीकाकरण व पेट के कीड़े की दवा देती हैं ताकि पशु स्वस्थ रहे।गायत्री बाई अपने पशुओं सन्तुलित पशु आहार एवं मिनरल मिक्चर खिलाती हैं।
गायत्री बाई ने बताया कि वर्तमान में उनके 5 पशु दूध दे रहे हैं तथा 15 से 20 लीटर प्रतिदिन दुग्ध उत्पादन हो रहा है। वर्तमान में 150 लीटर दूध प्रतिदिन उत्पादित होकर जो 35 रूपये प्रति लीटर के भाव से बिकता है। इस प्रकार प्रतिदिन 5000 रूपए का दूध उत्पादन कर वह डेढ़ लाख रूपये मासिक कमा रही हैं। गायत्री बाई एवं उसका परिवार पशुपालन कर पूरी तरह से आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर व सक्षम परिवार बन गया है।