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December 26, 2025, 1:27 pm
KHABAR : साफ सोच, सच्ची मेहनत से बदली खेती की तक़दीर, सोनकच्छ की जैविक खेती बनी मुनाफे का मॉडल, पढे़ मनोज शुक्ला की खबर 

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सोनकच्छ। कहते हैं सोच साफ हो, मेहनत सच्ची हो और धैर्य बना रहे कृ तो खेती भी किस्मत बदल सकती है। इस कहावत को देवास जिले के सोनकच्छ क्षेत्र के भटकुंड गांव के किसान ठाकुर रघुवीर सिंह बघेल ने हकीकत में बदल कर दिखा दिया है। जिला पंचायत के उपाध्यक्ष होने के साथ-साथ ठाकुर रघुवीर सिंह बघेल एक प्रगतिशील और सफल किसान भी हैं। करीब 6 साल पहले उनके पिता, पूर्व विधायक ठाकुर राजेन्द्र सिंह बघेल ने उन्हें खेती का तरीका बदलने और जैविक खेती अपनाने की सलाह दी। उसी समय उन्होंने रासायनिक खेती छोड़कर जैविक खेती की राह पकड़ी और अपनी जमीन के एक हिस्से में अमरूद का बगीचा लगाया।


आज यह फैसला उनके लिए वरदान साबित हुआ है। उनके बगीचे में रेड डायमंड, ब्लैक डायमंड और थाई पिंक जैसी उन्नत किस्मों के अमरूद हैं। एक पेड़ से साल में तीन बार करीब 40 से 50 किलो तक फल का उत्पादन होता है। शुरुआत में जहां 10-20 किलो उत्पादन होता था, वहीं आज रोजाना डेढ़ से दो क्विंटल तक तुड़ाई हो रही है, जो करीब एक महीने तक लगातार चलती है।


ठाकुर रघुवीर सिंह बघेल ने खेती में एक अनोखा मॉडल अपनाया। अमरूद के पेड़ों के बीच खाली जगह में गेहूं, आलू, प्याज और चना बोया जाता है। यानी एक ही जमीन से फल और अनाज कृ दोनों से कमाई। सिर्फ दो एकड़ में अमरूद की खेती से पिछले 3-4 सालों से हर साल 2 से 3 लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा हो रहा है। इसके अलावा बीच की जमीन से गेहूं और दूसरी फसलों की आमदनी अलग से मिलती है।


वे बताते हैं कि फलदार पौधों में शुरुआती एक-दो साल मेहनत ज्यादा होती है, लेकिन बाद में खर्च बेहद कम रह जाता है। सिर्फ पानी देना और साल में एक-दो बार गोबर की खाद डालना पड़ता है। तुड़ाई और मंडी तक ले जाने के अलावा खास लागत नहीं आती। जहां गेहूं से मुश्किल से 70-80 हजार रुपये की आमदनी होती है, वहीं फलदार खेती से कहीं ज्यादा फायदा मिलता है।


आज वे अपने पिता की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए करीब 25 एकड़ जमीन में पूरी तरह स्थायी जैविक खेती कर रहे हैं। खेतों में अमरूद और नींबू के पेड़ों के साथ-साथ गेहूं, आलू और बरसीम की फसल भी ली जाती है। खाद के लिए घर में गायें हैं, जिनके गोबर से पंचगव्य, जीवामृत, निर्मास्त्र और केंचुआ खाद तैयार कर खेतों में उपयोग की जाती है। ठाकुर रघुवीर सिंह बघेल जिले के किसानों से अपील करते हैं कि वे परंपरागत खेती के साथ-साथ जैविक खेती पर भी ध्यान दें, ताकि कम लागत में ज्यादा मुनाफा कमाया जा सके और खेती को सही मायनों में लाभ का धंधा बनाया जा सके।


किसान ठाकुर रघुवीर कहते हैं की 
“अगर किसान सही सोच, मेहनत और धैर्य के साथ जैविक खेती अपनाएं, तो कम लागत में भी लाखों की कमाई संभव है। खेती सिर्फ गुजर-बसर नहीं, मुनाफे का मजबूत जरिया बन सकती है।”

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