प्रतापगढ़। धरियावद कस्बे में स्थित श्रीराम-लक्ष्मण मंदिर से जुड़ी भूमि को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद में न्यायालय ने अहम अंतरिम आदेश पारित किया है। अदालत ने दोनों पक्षों को वादग्रस्त स्थल पर किसी भी प्रकार का नया निर्माण कार्य या तोड़-फोड़ करने से रोकते हुए यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। यह आदेश अंतरिम निषेधाज्ञा की सुनवाई के बाद जारी किया गया।
प्रकरण में मंदिर के वैरागी समाज के पुजारियों और स्थानीय सोनी समाजजन ने दावा किया कि खाता संख्या 973 में वर्णित मंदिर एवं कृषि भूमि पर वे पीढ़ियों से पूजा-अर्चना करते आ रहे हैं। प्रार्थी पक्ष की ओर से अधिवक्ता सिद्धार्थ मोदी ने बताया कि विपक्षी पक्ष ने अनाधिकृत रूप से मंदिर की भूमि पर अतिक्रमण किया, धार्मिक ओटले और पदचिन्हों को तोड़ा और कब्जा करने का प्रयास किया। प्रार्थियों ने न्यायालय से अनुरोध किया कि विपक्षी पक्ष को किसी भी निर्माण या तोड़-फोड़ से रोका जाए। अपने पक्ष के समर्थन में मंदिर के फोटोग्राफ और पूर्वजों के नाम दर्ज राजस्व नकल भी प्रस्तुत की गई।
विपक्षी पक्ष ने दलील दी कि मंदिर के वास्तविक व्यवस्थापक वही हैं और प्रार्थीगण ने भूमि हड़पने के लिए अनधिकृत निर्माण किया, जिसे हटाया गया है।
न्यायालय ने दोनों पक्षों की दलीलों और दस्तावेजों की समीक्षा के बाद आदेश दिया कि अब तक हुए निर्माण से आगे कोई नया निर्माण कार्य नहीं किया जाए। मामले की अगली सुनवाई 8 जनवरी 2026 को निर्धारित की गई है।