भोपाल/नीमच। मध्य प्रदेश में राज्यसभा की एक सीट को लेकर कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह का राज्यसभा कार्यकाल आगामी 9 अप्रैल को समाप्त हो रहा है। दिग्विजय सिंह ने स्पष्ट कर दिया है कि वे तीसरी बार राज्यसभा नहीं जाएंगे। उनके इस फैसले के बाद कांग्रेस में संभावित उम्मीदवारों को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। इसी कड़ी में नीमच-मंदसौर संसदीय क्षेत्र की पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन का नाम राज्यसभा की दौड़ में प्रमुखता से सामने आ रहा है।

दिग्विजय सिंह ने खुद दी सीट खाली करने की जानकारी-
भोपाल स्थित कांग्रेस के समन्वय भवन में मंगलवार को मीडिया से चर्चा के दौरान दिग्विजय सिंह से जब यह पूछा गया कि कांग्रेस के अनुसूचित जाति विभाग के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने उन्हें पत्र लिखकर राज्यसभा में अनुसूचित जाति वर्ग के नेता को भेजने की मांग की है, तो इस पर उन्होंने कहा- यह फैसला मेरे हाथ में नहीं है, पार्टी नेतृत्व तय करता है। लेकिन मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि मैं अपनी राज्यसभा सीट खाली कर रहा हूं।

विधानसभा चुनाव पर फोकस करेंगे दिग्विजय-
सूत्रों के अनुसार दिग्विजय सिंह ने पार्टी आलाकमान को भी यह संकेत दे दिया है कि वे अब राज्यसभा की बजाय मध्य प्रदेश की राजनीति पर पूरा ध्यान देना चाहते हैं। वर्ष 2028 में होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए वे प्रदेशभर का दौरा कर संगठन को मजबूत करने की रणनीति पर काम करेंगे। बताया जा रहा है कि वे बड़ी सभाओं की बजाय विधानसभा और ब्लॉक स्तर पर छोटी बैठकें कर कांग्रेस की जमीनी पकड़ मजबूत करेंगे।

कांग्रेस में एससी प्रतिनिधित्व की मांग तेज-
राज्यसभा सीट को लेकर कांग्रेस के भीतर सामाजिक समीकरण भी सामने आ रहे हैं। प्रदेश कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने दिग्विजय सिंह को पत्र लिखकर राज्यसभा में अनुसूचित जाति वर्ग के प्रतिनिधि को भेजने की मांग की है। अहिरवार ने पत्र में उल्लेख किया कि दिग्विजय सिंह ने हाल ही में यह बयान दिया था कि यदि एससी/एसटी वर्ग से कोई मुख्यमंत्री बनता है तो उन्हें प्रसन्नता होगी। इसी भावना के अनुरूप राज्यसभा में भी इस वर्ग को अवसर मिलना चाहिए।

मीनाक्षी नटराजन की मजबूत दावेदारी-
दिग्विजय सिंह के हटने के बाद राज्यसभा की दौड़ में जिन नामों की चर्चा है, उनमें नीमच-मंदसौर की पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव और विधायक कमलेश्वर पटेल प्रमुख हैं। मीनाक्षी नटराजन कांग्रेस की राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा चुकी हैं और संगठनात्मक अनुभव के साथ-साथ महिला एवं युवा नेतृत्व के रूप में उनकी पहचान रही है। ऐसे में पार्टी के लिए वे एक संतुलित और स्वीकार्य विकल्प मानी जा रही हैं।

दिल्ली तक पहुंची लॉबिंग-
सूत्रों के अनुसार कांग्रेस को मध्य प्रदेश से एक राज्यसभा सीट मिलने की संभावना है। इसी एक सीट को लेकर दिल्ली में कांग्रेस नेताओं की लॉबिंग तेज हो गई है। आलाकमान स्तर पर सामाजिक संतुलन, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और संगठनात्मक योगदान को ध्यान में रखकर निर्णय लिया जाएगा।

कमलनाथ को राज्यसभा भेजे जाने की भी चर्चा-
राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी है कि पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ को मध्य प्रदेश से राज्यसभा भेजा जा सकता है। पार्टी के भीतर इस पर विचार चल रहा है कि उन्हें राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी के साथ राज्यसभा में भेजकर केंद्र की राजनीति में सक्रिय भूमिका दी जाए। कमलनाथ केंद्र सरकार में कई महत्वपूर्ण मंत्रालयों का नेतृत्व कर चुके हैं और लंबे समय तक लोकसभा सांसद रहे हैं।

कांग्रेस के लिए अहम फैसला-
दिग्विजय सिंह के राज्यसभा से हटने के बाद कांग्रेस के सामने यह फैसला बेहद अहम हो गया है कि पार्टी किस नेता को यह अवसर देती है। क्या पार्टी सामाजिक न्याय के मुद्दे को प्राथमिकता देगी, या संगठनात्मक मजबूती और क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखेगी- यह आने वाले दिनों में साफ हो जाएगा। फिलहाल मीनाक्षी नटराजन सहित कई नामों पर मंथन जारी है और राज्यसभा की यह एक सीट मध्य प्रदेश कांग्रेस की राजनीति का केंद्र बन चुकी है।
