देवास। राजस्थान में हाल ही में हुई स्लीपर बस में आगजनी की घटना के बाद देवास जिले में यात्री बसों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। कलेक्टर ऋतुराज सिंह के निर्देशानुसार जिला परिवहन विभाग द्वारा लगातार जांच एवं कार्रवाई की जा रही है।
इसी क्रम में तड़के सुबह 4ः00 बजे से देवास-भोपाल फोरलेन पर भौरासा टोल टैक्स के समीप लंबी दूरी की स्लीपर बसों का विशेष जांच अभियान चलाया गया। जिला परिवहन अधिकारी निशा चौहान के मार्गदर्शन में परिवहन उपनिरीक्षक मीनाक्षी गोखले एवं उनके दल ने स्लीपर कोच बसों को रोक-रोककर सुरक्षा मानकों और वैधानिक दस्तावेजों की जांच की।
जांच के दौरान बसों में शासन द्वारा निर्धारित मापदंडों की सख्ती से पड़ताल की गई। इसमें अग्निशमन यंत्र, आपातकालीन द्वार, पैनिक बटन, स्लाइडर, तथा चालक सीट के पीछे लगे अवैध पार्टीशन गेट की जांच शामिल रही। जिन बसों में चालक सीट के पीछे पार्टीशन गेट पाए गए, उन्हें मौके पर ही तत्काल हटवाया गया।
परिवहन विभाग ने स्पष्ट निर्देश दिए कि शासन के आदेशों का शत-प्रतिशत पालन अनिवार्य है, किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
जैसे ही आरटीओ की सख्त कार्रवाई की सूचना बस संचालकों को मिली, कई स्लीपर बसों ने देवास-भोपाल मुख्य मार्ग छोड़कर भौरासा नगर के अंदरूनी रास्तों से निकलना शुरू कर दिया। तड़के सुबह नगर के भीतर से बड़ी संख्या में बसें गुजरती देख स्थानीय लोग हैरान रह गए। बाद में पता चला कि फोरलेन पर आरटीओ की चेकिंग से बचने के लिए बसें गांव के रास्तों से निकाली जा रही थीं।
परिवहन विभाग की इस कार्रवाई से बस संचालकों में हड़कंप मच गया है, वहीं यात्रियों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन की सख्ती साफ नजर आ रही है।