चित्तौड़गढ़। पूर्व सहकारिता मंत्री उदयलाल आंजना ने संसद में प्रस्तुत केंद्रीय बजट 2026-27 को आम जनता की उम्मीदों पर पानी फेरने वाला बताते हुए कहा कि यह बजट केवल आंकड़ों की बाजीगरी और शब्दों का खेल है, जबकि धरातल पर आम आदमी की समस्याओं का कोई ठोस समाधान इसमें नजर नहीं आता।
मध्यम वर्ग और करदाताओं को निराशा-
आंजना ने कहा कि सरकार ने ‘नया आयकर अधिनियम 2025’ लागू करने की घोषणा तो की है, लेकिन आयकर स्लैब में कोई बदलाव नहीं कर वेतनभोगी और मध्यम वर्ग को पूरी तरह निराश किया गया है। महंगाई के इस दौर में कर राहत की उम्मीद लगाए बैठे मध्यम वर्ग के साथ यह अन्याय है।
रोजगार सृजन का अभाव-
पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष सुभाषचंद्र शारदा ने कहा कि बजट में बुनियादी ढांचे पर खर्च के दावे किए गए हैं, लेकिन शिक्षित युवाओं के लिए तत्काल रोजगार उपलब्ध कराने का कोई स्पष्ट रोडमैप नहीं है। ‘चौंपियन एमएसएमई’ जैसी योजनाएं केवल कागजों तक सीमित हैं, जबकि छोटे उद्योग आज भी जीएसटी और जटिल नियमों से जूझ रहे हैं।
किसानों की आय पर चुप्पी-
ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष संपत धाकड़ ने कहा कि बजट में किसानों के लिए ‘भारत विस्तार’ जैसे एआई टूल्स की बात तो की गई है, लेकिन स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुसार एमएसपी की कानूनी गारंटी और बढ़ती उत्पादन लागत पर कोई ठोस घोषणा नहीं की गई। कृषि क्षेत्र के लिए आवंटन महंगाई के अनुपात में अपर्याप्त है।
बढ़ती उधारी से चिंता-
नगर कांग्रेस अध्यक्ष बंशीलाल राईवाल ने कहा कि सरकार 17.2 लाख करोड़ रुपये की भारी उधारी लेने जा रही है, जिससे भविष्य में ब्याज का बोझ बढ़ेगा। राजकोषीय घाटे को 4.3 प्रतिशत तक सीमित करने का लक्ष्य भी राजस्व संग्रह की स्थिति को देखते हुए अव्यवहारिक प्रतीत होता है।
निवेशकों के लिए झटका-
ब्लॉक कांग्रेस कार्यकारी अध्यक्ष भोपराज टांक ने कहा कि फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस पर प्रतिभूति लेनदेन कर बढ़ाने और शेयर बायबैक पर कैपिटल गेन टैक्स लगाने से छोटे निवेशकों का मनोबल कमजोर होगा। यह बजट निवेश को बढ़ावा देने की बजाय उसे हतोत्साहित करता है।
शिक्षा और स्वास्थ्य की अनदेखी-
नगर कांग्रेस संगठन महासचिव रविप्रकाश सोनी ने कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे बुनियादी क्षेत्रों में कोई बड़ा सुधार या पर्याप्त बजट वृद्धि नहीं की गई है। नए संस्थानों की घोषणा तो हुई है, लेकिन मौजूदा संस्थानों की स्थिति सुधारने के लिए संसाधनों का अभाव साफ दिखाई देता है।
पूर्व सहकारिता मंत्री उदयलाल आंजना ने कहा कि केंद्र सरकार पिछले 11 वर्षों से लगातार वादे कर रही है, लेकिन उन्हें जमीन पर उतारने में विफल रही है। इसका दुष्परिणाम यह है कि मध्यम और छोटे उद्योग प्रभावित हो रहे हैं, युवाओं को रोजगार नहीं मिल पा रहा और अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक असर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि दिशाहीन आर्थिक, विदेश और व्यापार नीतियों के कारण देश अपनी वास्तविक विकास क्षमता को हासिल नहीं कर पा रहा है, जिसकी झलक इस बजट में भी साफ दिखाई देती है।