चित्तौड़गढ़। पूर्व राज्यमंत्री सुरेंद्रसिंह जाड़ावत ने राज्य सरकार पर किसान विरोधी नीति अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि समर्थन मूल्य पर फसल खरीद की समय-सीमा 30 जून से घटाकर 31 मई करना किसानों के साथ अन्याय है।
उन्होंने कहा कि सहकारिता मंत्री का जिले से जुड़ाव होने के बावजूद किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए खरीद अवधि में कटौती नहीं की जानी चाहिए थी। न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर फसलों की खरीद का समय कम करना अथवा खरीद प्रक्रिया में देरी करना अन्नदाता किसानों के लिए बड़ी चुनौती है।
जाड़ावत ने कहा कि कई किसानों ने स्लॉट बुक करवा रखा है और वे अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। ऐसे में यदि सरकारी खरीद केंद्र समय से पहले बंद हो जाते हैं, तो किसानों को मजबूरी में अपनी उपज औने-पौने दामों पर बिचौलियों को बेचना पड़ता है, जो अक्सर एमएसपी से कम होते हैं।
उन्होंने कहा कि फसल कटाई के बाद किसानों को अगली बुवाई के लिए नकदी की आवश्यकता होती है। खरीद में देरी या समय कम होने से किसानों को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ता है।
जाड़ावत ने कहा कि समर्थन मूल्य की गारंटी नहीं होना और ऊपर से खरीद अवधि कम कर देना किसानों की आय को सीधे प्रभावित करता है तथा उन्हें कर्ज के जाल में धकेल सकता है।
उन्होंने सरकार से मांग की कि किसानों के हित में समर्थन मूल्य खरीद की अवधि पुनः 30 जून तक बढ़ाई जाए, ताकि पहले से आर्थिक संकट झेल रहे किसानों को राहत मिल सके।