देवास। जिला अस्पताल में दिव्यांगता प्रमाण पत्र के नवीनीकरण को लेकर लापरवाही सामने आई, जहां दृष्टिबाधित बच्ची को इंदौर भेजने की बात कहकर भटकाया गया।
परिजनों ने बताया कि बच्ची के पास पहले से 40 प्रतिशत प्रमाण पत्र इसी अस्पताल से बना हुआ है, फिर भी नवीनीकरण में टालमटोल की गई।
मामला तब बढ़ा जब भाजपा नेता राजेश यादव मौके पर पहुंचे और डॉक्टरों से सवाल-जवाब के दौरान तीखी बहस हो गई।उन्होंने सवाल उठाया कि जब पुराना प्रमाण पत्र इसी अस्पताल से बना है, तो नवीनीकरण में दिक्कत क्यों।इसके बाद डॉक्टरों ने जांच कर प्रमाण पत्र बनाने की प्रक्रिया शुरू की।
सबसे बड़ा सवाल यह है की आज एक जनप्रतिनिधि के हस्तक्षेप से बच्ची का काम हो गया, लेकिन रोजाना सैकड़ों गरीब मरीज इलाज और कागजी प्रक्रियाओं के लिए यहां आते हैंकृउनकी सुनवाई कौन करेगा? क्या बिना सिफारिश के आम लोगों को यूं ही भटकना पड़ेगा?
यह घटना जिला चिकित्सालय की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है, जहां जरूरतमंद मरीजों को राहत के बजाय परेशानियों का सामना करना पड़ रहा