इंदौर। जल संकट को लेकर कांग्रेस ने शहर सरकार पर हमला बोला है। कांग्रेस कार्यकर्ता अपने नेताओं के नेतृत्व में सभी जोन कार्यालयों के सामने प्रदर्शन कर मटके फोड़ रहे हैं। जोन-5 में सुखलिया चौराहा पानी की टंकी के पास कांग्रेस पार्षद राजू भदौरिया के नेतृत्व में रहवासियों ने विरोध प्रदर्शन किया।
कार्यकर्ताओं और रहवासियों ने नारेबाजी की और मटके फोड़कर विरोध दर्ज कराया। उन्होंने नगर निगम के अधिकारियों, विधायक, महापौर और एडिशनल कमिश्नर को चेतावनी दिए कि जल संकट हल नहीं हुआ तो आगे और उग्र आंदोलन किया जाएगा।
आधी आबादी तक नहीं पहुंच रहा नर्मदा का पानी
इंदौर शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे ने आरोप लगाया कि नगर निगम की लापरवाही के कारण शहर गंभीर जल संकट से गुजर रहा है। उन्होंने कहा कि शहर की आधी आबादी तक नर्मदा का पानी नहीं पहुंच पा रहा है और जहां पानी पहुंच रहा है वहां भी पर्याप्त दबाव और समय तक सप्लाई नहीं मिल रही।
उन्होंने कहा कि कई क्षेत्रों में गंदा पानी आने की समस्या अब भी बनी हुई है। चौकसे ने आरोप लगाया कि 35 लोगों की मौत के बाद भी नगर निगम ने स्थिति सुधारने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए।
27 साल के शासन में भी हर घर तक पानी नहीं
कांग्रेस ने भाजपा के 27 वर्षों के नगर निगम शासन पर सवाल उठाते हुए कहा कि इतने लंबे समय के बाद भी शहर के प्रत्येक नागरिक तक नर्मदा जल पहुंचाने की व्यवस्था नहीं हो सकी। चौकसे ने कहा कि नर्मदा परियोजना के तीसरे चरण के समय दावा किया गया था कि साल 2040 तक की आबादी के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध रहेगा, लेकिन वर्तमान में साल 2026 की आबादी को भी पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा।
बोरिंग और मोटर खराब होने से बढ़ी परेशानी
कांग्रेस का आरोप है कि जिन क्षेत्रों में नर्मदा पाइपलाइन नहीं है वहां लोग बोरिंग के पानी पर निर्भर हैं। तेज गर्मी के कारण कई बोरिंग सूख गए हैं या मोटरें खराब हो गई हैं। चौकसे ने आरोप लगाया कि नगर निगम के सरकारी बोरिंगों की स्थिति और खराब है। उन्होंने कहा कि पूरे शहर की मोटर सुधारने का ठेका केवल एक ठेकेदार को दिया गया है, जो काम छोड़ने की बात कह चुका है, लेकिन निगम ने वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की।
वीआईपी क्षेत्रों में ज्यादा पानी, आम जनता परेशान
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि शहर में जल वितरण असमान है। कुछ वीआईपी क्षेत्रों में लंबे समय तक और अधिक दबाव से पानी दिया जा रहा है, जबकि आम लोग पानी के लिए परेशान हैं। उन्होंने कहा कि लोग निजी टैंकरों से महंगा पानी खरीदने को मजबूर हैं। पार्षदों को दिए गए टैंकर भी पर्याप्त पानी नहीं भर पा रहे क्योंकि कई हाइड्रेंट बंद पड़े हैं।