नीमच। जिले की रामपुरा तहसील अंतर्गत ग्राम बैसला में मृत व्यक्ति की कृषि भूमि पर फर्जी वारिस बनकर कब्जा करने के मामले में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) भोपाल ने बड़ी कार्रवाई की है। मामले में तत्कालीन सरपंच, सचिव, पटवारी, तहसीलदार सहित अन्य आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार की धाराओं में प्रकरण दर्ज किया गया है।
प्रेस नोट के अनुसार ग्राम बैसला निवासी भगवान मीणा पर मृतक केदार मीणा की करीब 2 हेक्टेयर कृषि भूमि हड़पने के उद्देश्य से स्वयं को वैध वारिस बताकर फर्जी दस्तावेज तैयार करवाने का आरोप है। जांच में सामने आया कि इस कार्य में ग्राम पंचायत बैसला की तत्कालीन सरपंच प्रेमलता अमर रावत, सचिव आनंद सक्सेना, तत्कालीन पटवारी अनुराग पाटीदार तथा तत्कालीन तहसीलदार बी.के. मकवाना सहित अन्य लोगों की भूमिका रही।
ईओडब्ल्यू जांच में पाया गया कि आरोपियों ने फर्जी वारिसान प्रमाण पत्र, असत्य वंशावली और पंचनामा तैयार कर नामांतरण प्रक्रिया पूरी करवाई। इसके आधार पर मृतक केदार मीणा की कृषि भूमि भगवान मीणा के नाम दर्ज कर दी गई।
शिकायत क्रमांक 772/25 की जांच के बाद आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए जाने पर ईओडब्ल्यू भोपाल ने भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 467, 468, 471, 120-बी तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है।
जांच एजेंसी के अनुसार राजस्व विभाग और ग्राम पंचायत के कर्मचारियों द्वारा पद का दुरुपयोग कर सुनियोजित तरीके से फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए। ईओडब्ल्यू ने संकेत दिए हैं कि जांच के दौरान मामले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।