खरगोन। जिले के कसरावद स्थित शासकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था अब स्थानीय लोगों के लिए गंभीर समस्या बनती जा रही है। करोड़ों रुपए खर्च होने के बावजूद अस्पताल में डॉक्टरों की भारी कमी बनी हुई है, जिससे इलाज व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
स्थिति यह है कि लगभग 2.5 लाख की आबादी के लिए अस्पताल में सिर्फ तीन डॉक्टर ही सेवाएं दे रहे हैं। इनमें एक महिला डॉक्टर, एक पुरुष डॉक्टर और डॉ. चंद्रेश दीक्षित शामिल हैं, जो रोजाना आने वाले मरीजों का भार संभाल रहे हैं।
स्वीकृत पदों के मुकाबले कई डॉक्टर लंबे समय से अनुपस्थित बताए जा रहे हैं। इसके चलते ओपीडी में मरीजों की लंबी कतारें लग रही हैं और कई लोगों को 2 से 3 घंटे तक इंतजार करना पड़ रहा है।
सबसे गंभीर स्थिति रात के समय इमरजेंसी सेवाओं में देखने को मिल रही है। परिजनों का आरोप है कि रात में डॉक्टर उपलब्ध न होने के कारण गंभीर मरीजों को खरगोन और इंदौर रेफर करना पड़ रहा है। प्रसूता महिलाओं और बच्चों को सबसे अधिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों में स्वास्थ्य विभाग के प्रति नाराजगी बढ़ती जा रही है। एक मरीज के परिजन ने कहा कि सुबह से लाइन में लगे रहने के बावजूद घंटों तक इलाज नहीं मिल पा रहा है, जिससे आम जनता को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है।
इस बीच क्षेत्रीय लोगों ने बीएमओ डॉ. संतोष बड़ोले की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि अस्पताल की अव्यवस्थाओं और डॉक्टरों की अनुपस्थिति के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है।
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने सीएमएचओ खरगोन से मांग की है कि अस्पताल में तत्काल डॉक्टरों की नियुक्ति की जाए और अनुपस्थित रहने वाले चिकित्सकों पर सख्त प्रशासनिक कार्रवाई हो। जनता का कहना है कि अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर सुधार जरूरी है।