मुरैना। शहर में आज सुबह 11:00 बजे से ऐसा भीषण जाम लगा कि पूरा शहर थम सा गया। शहर की सड़कों पर चारों तरफ वाहनों की लंबी कतारें नजर आईं, लोग घंटों तक जाम में फंसे रहे, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी और यातायात पुलिस कहीं दिखाई नहीं दी। सबसे खराब हालात शहर कोतवाली के सामने देखने को मिले, जहां सड़कें पूरी तरह जाम हो गईं और लोग परेशान होकर खुद ही रास्ता बनवाने में जुट गए।
हालत इतने खराब थे कि कई एंबुलेंस भी जाम में फंस गईं। मरीजों को लेकर जा रहे वाहन सायरन बजाते रहे, लेकिन ना कोई यातायात पुलिस कर्मी मौके पर पहुंचा और ना ही प्रशासन की ओर से कोई व्यवस्था दिखाई दी। आम जनता तपती धूप में घंटों परेशान होती रही और शहर की ट्रैफिक व्यवस्था मजाक बनकर रह गई।
मुरैना की जनता को उम्मीद थी कि नवागत पुलिस अधीक्षक शहर की बिगड़ी यातायात व्यवस्था को सुधारेंगे, लेकिन हालात देखकर अब लोगों का भरोसा टूटता नजर आ रहा है। शहर के अधिकांश ट्रैफिक प्वाइंट खाली पड़े रहते हैं। यातायात पुलिस शहर की बजाय हाईवे पर ज्यादा नजर आती है, जबकि शहर के अंदर रोज जाम की समस्या विकराल रूप लेती जा रही है।
कोतवाली के सामने जाम लगना अपने आप में प्रशासनिक लापरवाही की बड़ी तस्वीर दिखाता है। जहां पुलिस की सबसे ज्यादा मौजूदगी होनी चाहिए, वहीं लोग घंटों तक जाम में फंसे रहे। दुकानदार, राहगीर, मरीज, छात्र और नौकरीपेशा लोग सभी इस अव्यवस्था से परेशान दिखाई दिए।
हर बार सड़क सुरक्षा सप्ताह मनाया जाता है, नियमों की बातें होती हैं, हेलमेट और सीट बेल्ट के चालान काटे जाते हैं, लेकिन जब शहर की यातायात व्यवस्था संभालने की बात आती है तो सारे नियम और दावे फेल नजर आते हैं। जनता का सवाल साफ है —
क्या सिर्फ चालान काटना ही यातायात व्यवस्था है?
क्या शहर को जाम से राहत दिलाने की कोई जिम्मेदारी नहीं?
क्या मुरैना की जनता इसी तरह हर दिन परेशान होती रहेगी?
आज के हालात ने एक बार फिर साबित कर दिया कि मुरैना की यातायात व्यवस्था भगवान भरोसे चल रही है। अगर समय रहते प्रशासन और पुलिस विभाग ने ध्यान नहीं दिया, तो आने वाले दिनों में हालात और भी भयावह हो सकते हैं।