उज्जैन। भारतीय मजदूर संघ से संबद्ध आशा एवं सुपरवाइजर कर्मचारी महासंघ के बैनर तले आशा कार्यकर्ताओं का धरना प्रदर्शन चौथे दिन भी जारी रहा। कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि उन्हें पिछले कई महीनों से मानदेय का भुगतान नहीं किया गया है, जिससे आर्थिक संकट गहरा गया है। प्रदर्शन में शामिल महिलाओं ने सरकार और अधिकारियों से लंबित भुगतान जल्द जारी करने की मांग की।
उज्जैन में आशा एवं सुपरवाइजर कर्मचारी महासंघ द्वारा अपनी विभिन्न मांगों को लेकर लगातार चौथे दिन धरना प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शन में जिलेभर से करीब 200 आशा कार्यकर्ता शामिल हुईं और नारेबाजी कर अपना विरोध दर्ज कराया।
प्रदेश महामंत्री सुमन पटेल ने बताया कि आशा कार्यकर्ता ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में 24 घंटे स्वास्थ्य सेवाएं देने का काम करती हैं, लेकिन उन्हें समय पर मानदेय नहीं मिल रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई आशा कार्यकर्ताओं का चार से पांच महीने का भुगतान लंबित है। वर्ष 2025 के बकाया भुगतान का भी अभी तक पूरा हिसाब नहीं हुआ है।
उन्होंने कहा कि कुछ कार्यकर्ताओं को अलग-अलग राशि दी गई है, किसी को 7 हजार, किसी को 8 हजार, तो किसी को 10-11 हजार रुपए मिले हैं, जबकि बाकी भुगतान रोक दिया गया है। इससे कार्यकर्ताओं में नाराजगी बढ़ रही है। संगठन का कहना है कि भुगतान न होने के पीछे सरकार या अधिकारियों में से कौन जिम्मेदार है, यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा है।
जिले में 2 हजार कार्यकर्ता प्रभावित
सुमन पटेल ने बताया कि प्रदेश में करीब 90 हजार और जिले में लगभग 2 हजार आशा कार्यकर्ता प्रभावित हैं। दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों से महिलाएं 100-100 किलोमीटर का सफर तय कर धरने में शामिल होने पहुंच रही हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द उनकी मांगें पूरी नहीं की गईं तो प्रदेशभर की आशा कार्यकर्ता भोपाल में बड़ा आंदोलन करने को मजबूर होंगी।
धरने के दौरान आशा कार्यकर्ताओं ने लंबित मानदेय का तत्काल भुगतान, नियमित वेतन व्यवस्था और अन्य लंबित मांगों को पूरा करने की मांग उठाई। संगठन ने कहा कि जब तक मांगों का समाधान नहीं होगा, आंदोलन जारी रहेगा।