नीमच। ग्राम खिमला, जिला नीमच में ग्रीनको ग्रुप द्वारा निर्माणाधीन 1920 मेगावाट की पंप स्टोरेज परियोजना नीमच, मंदसौर सहित पूरे क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण ऊर्जा आधार बनने जा रही है। लगभग 11,470 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली यह परियोजना प्रदेश की सबसे बड़ी ऊर्जा परियोजनाओं में से एक मानी जा रही है।
इस महत्वाकांक्षी परियोजना का शिलान्यास 4 अक्टूबर 2023 को तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा वर्चुअल माध्यम से किया गया था। वर्तमान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी इसे मध्यप्रदेश के ऊर्जा क्षेत्र की एक बड़ी उपलब्धि बताया है। अब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 29 जून को नीमच प्रवास के दौरान इस परियोजना स्थल का साइड विजिट कर कार्य प्रगति का जायजा लेंगे।
परियोजना के अनुसार गांधीसागर जलाशय को आधार बनाते हुए पंप स्टोरेज प्रणाली विकसित की जा रही है। इसमें मौजूदा निचले जलाशय (गांधीसागर) से पानी पंप कर ऊपरी जलाशय में संग्रहित किया जाएगा और आवश्यकता अनुसार बिजली उत्पादन के लिए पुनः उपयोग किया जाएगा। इस प्रणाली से लगभग 10326 मेगावाट प्रति घंटे ऊर्जा भंडारण क्षमता प्राप्त होने का अनुमान है।
इस परियोजना में कुल नौ रिवर्सिबल फ्रांसिस टरबाइन इकाइयां स्थापित की जा रही हैं, जिनमें 240 मेगावाट की 7 इकाइयां तथा 120 मेगावाट की 2 इकाइयां शामिल हैं। परियोजना की चक्र दक्षता लगभग 79.44 प्रतिशत रहने की संभावना है, जबकि मशीन उपलब्धता लगभग 95 प्रतिशत अनुमानित है।
परियोजना के लिए लगभग 402.50 हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता है, जिसमें वन एवं गैर-वन भूमि शामिल है। निर्माण कार्य लगभग साढ़े तीन वर्षों में पूर्ण किए जाने का लक्ष्य रखा गया है।
ग्रीनको परियोजना से क्षेत्र में रोजगार के बड़े अवसर सृजित हो रहे हैं। प्रतिदिन लगभग 3000 से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिल रहा है। यह परियोजना स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति देने के साथ-साथ ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
परियोजना से उत्पन्न बिजली की निकासी हेतु 420 केवी डबल सर्किट ट्रांसमिशन लाइन का निर्माण प्रस्तावित है, जो नीमच स्थित 400/220 केवी पीजीसीआईएल सबस्टेशन से जुड़ी होगी।
इस परियोजना का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इसमें गांधीसागर जलाशय के पानी का पुनः उपयोग किया जाएगा, जिससे जल की हानि न्यूनतम (5 प्रतिशत से भी कम) रहने का अनुमान है। पंप स्टोरेज तकनीक के कारण यह प्रणाली पर्यावरण अनुकूल और सतत ऊर्जा उत्पादन का एक प्रभावी मॉडल मानी जा रही है।
इस मेगा प्रोजेक्ट के पूर्ण होने पर नीमच, मंदसौर और आसपास का क्षेत्र ऊर्जा उत्पादन का बड़ा केंद्र बन सकता है तथा मध्यप्रदेश को ऊर्जा क्षेत्र में नई पहचान मिलने की संभावना है।