सोनकच्छ। मोहर्रम की 10वीं तारीख (यौमे आशूरा) पर सोनकच्छ में 365 वर्षों से चली आ रही परंपरा के तहत ऐतिहासिक और भव्य जुलूस निकाला गया। इमाम हुसैन की याद में निकले इस जुलूस में बड़े साहब, छोटे साहब, बुर्राक और दुल-दुल साहब की सवारियां श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहीं। पूरे नगर में “हुसैन अल मदद” के नारों से माहौल गूंज उठा।
चमन बाजार स्थित चबूतरे से बड़े साहब को बाहर लाने के दौरान हजारों जायरीन ने दुआएं कीं। बड़े साहब के दीदार के लिए दोनों समुदायों के हजारों लोग चबूतरे पर मौजूद रहे। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के चलते क्षेत्र पूरी तरह आस्था और श्रद्धा के रंग में रंगा नजर आया।
जुलूस में नगर के सैकड़ों युवाओं ने सवारियों को अपने कंधों पर उठाकर परंपरा का निर्वहन किया। तिलक मार्ग, कालीसिंध मार्ग और नदी किनारे के मार्गों पर भारी भीड़ के कारण जुलूस की गति धीमी रही और आगे बढ़ने में एक घंटे से अधिक समय लगा। बड़ी संख्या में लोग घरों की छतों, दीवारों और गैलरियों से इस ऐतिहासिक जुलूस के दर्शन करते रहे।
इस अवसर पर सोनकच्छ के अलावा आसपास के दो दर्जन से अधिक गांवों तथा देवास, शाजापुर, सीहोर, भोपाल, इंदौर, उज्जैन और धार सहित विभिन्न जिलों से हजारों श्रद्धालु पहुंचे। जुलूस में हिंदू और मुस्लिम समाज की उल्लेखनीय सहभागिता देखने को मिली, जिसने सामाजिक सद्भाव, आपसी भाईचारे और गंगा-जमुनी संस्कृति की मिसाल पेश की।