चित्तौड़गढ़। राज्य सरकार द्वारा अफीम किसानों को पिछले आठ वर्षों के डोडाचूरा के नष्टीकरण को लेकर जारी किए गए नोटिस के विरोध में सोमवार को चित्तौड़गढ़ जिला मुख्यालय पर किसानों का बड़ा प्रदर्शन देखने को मिला। जिले के विभिन्न गांवों से सैकड़ों किसान कलेक्ट्रेट पहुंचे और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए कलेक्ट्रेट का घेराव किया। किसानों ने नोटिस को अव्यावहारिक बताते हुए तत्काल निरस्त करने की मांग की तथा चेतावनी दी कि मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन प्रदेशव्यापी होगा।
कॉलेज ग्राउंड से निकला पैदल मार्च, कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन-
प्रदर्शन की शुरुआत शहर के कॉलेज ग्राउंड से हुई, जहां जिलेभर से आए किसानों की सभा आयोजित की गई। सभा के बाद किसान हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर पैदल मार्च के रूप में शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचे। इस दौरान सरकार के खिलाफ नारेबाजी की गई।
कलेक्ट्रेट चौराहे पर किसानों ने प्रदर्शन कर प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। बड़ी संख्या में किसानों के जुटने से शहर की यातायात व्यवस्था प्रभावित रही। कई स्थानों पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं, जिसके चलते पुलिस को ट्रैफिक डायवर्ट करना पड़ा। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी पुलिस बल तैनात रहा।
ष्हर साल नष्टीकरण होता है, फिर 8 साल पुराना डोडाचूरा कहां से लाएं?ष्
प्रदर्शन के दौरान किसान नेताओं ने सरकार के नोटिस पर गंभीर सवाल उठाए। पूर्व डेयरी चेयरमैन बद्रीलाल जाट ने कहा कि वर्षों से प्रशासन की मौजूदगी में डोडाचूरा का नष्टीकरण होता रहा है। बाद में सरकार ने किसानों को स्वयं निर्धारित प्रक्रिया के तहत नष्टीकरण करने की अनुमति दी, जिसके बाद हर वर्ष नियमों के अनुसार डोडाचूरा नष्ट किया जाता है।
उन्होंने कहा कि यदि हर साल नष्टीकरण हो रहा है तो किसानों के पास आठ वर्ष पुराना डोडाचूरा होने का सवाल ही नहीं उठता। ऐसे में सरकार का नोटिस पूरी तरह अव्यावहारिक है और इसे तत्काल वापस लिया जाना चाहिए।
एनडीपीएस एक्ट से हटाने और मुआवजे की मांग-
किसानों ने मांग की कि डोडाचूरा को एनडीपीएस एक्ट के दायरे से हटाकर आबकारी अधिनियम के तहत शामिल किया जाए। उनका कहना है कि नष्टीकरण की पूरी प्रक्रिया आबकारी विभाग कराता है और नोटिस भी वही जारी करता है, फिर किसानों पर एनडीपीएस एक्ट के तहत कार्रवाई करना उचित नहीं है।
किसानों ने धारा 8/29 के कथित दुरुपयोग पर रोक लगाने की भी मांग की। उनका आरोप है कि कई मामलों में निर्दाेष किसानों को भी कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ता है।
इसके अलावा किसानों ने डोडाचूरा नष्टीकरण के लिए प्रति किलोग्राम 500 रुपये मुआवजा देने की मांग भी रखी। उनका कहना है कि खेती की लागत लगातार बढ़ रही है और किसानों को आर्थिक राहत मिलनी चाहिए।
भ्रष्टाचार के आरोप, आंदोलन तेज करने की चेतावनी-
प्रदर्शन के दौरान किसान नेताओं ने नारकोटिक्स जांच के नाम पर किसानों के उत्पीड़न और भ्रष्टाचार के आरोप भी लगाए। उन्होंने ऐसे मामलों की निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
किसानों ने कहा कि यह केवल सांकेतिक प्रदर्शन है। यदि सरकार ने शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो जिलेभर के किसान व्यापक आंदोलन करेंगे और संघर्ष को प्रदेश स्तर तक ले जाया जाएगा। किसानों ने स्पष्ट कहा कि उनकी मांगों की अनदेखी की गई तो आगामी आंदोलन और अधिक उग्र एवं व्यापक होगा।