इंदौर। बारिश की हल्की फुहारों और युवाओं की धड़कनों के बीच, इंदौर की सड़कों पर आज सियासत से ज्यादा किसी के आने का इंतजार है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के लिए युवाओं का हुजूम उमड़ को है, लेकिन इस में एक अलग ही रंग देखने को मिला- एक ऐसा रंग, जिसमें राहुल गांधी की एक झलक पाने की बेताबी है। इसी महफिल में अपनी कातिलाना मुस्कान और आंखों में ढेरों अरमान लिए पहुंचीं पीहू हासनी ने जब राहुल को लेकर दिल के राज खोले, तो माहौल में जैसे अचानक कोई रोमैंटिक नगमा गूंज उठा। पुणे, कोटा और प्रयागराज की गलियों को अपने नाम करने के बाद राहुल अब इंदौर की फिजाओं में कदम रख रहे हैं। पीहू की नजरों में राहुल सिर्फ एक राजनेता नहीं, बल्कि वो उम्मीद हैं जिसकी तलाश आज के हर धड़कते दिल को है। शिक्षा और रोजगार पर उनकी बातें तो दिलों को छूती ही हैं, पर उनकी शख्सियत का साया ही कुछ ऐसा है कि हर कोई खिंचा चला आता है।
“उनकी बांहों की पनाह में लड़कियां खुद को महफूज पाती हैं”
जब पीहू से पूछा गया कि आखिर क्यों राहुल गांधी को देखते ही लड़कियों की धड़कनें तेज हो जाती हैं? क्या कोई दिल उन्हें अपना हमसफर बनाने का ख्वाब देख रहा है? इस सवाल पर पीहू की आंखों में एक हलचल सी हुई, चेहरे पर हल्की सी लाली छा गई और एक प्यारी सी हंसी के साथ बोलीं- “हां, ऐसा हो सकता है क्यों नहीं?” पीहू ने अपने दिल की बात बयां करते हुए कहा कि राहुल सर की सबसे खूबसूरत बात यह है कि वे कोई नकाब नहीं पहनते, वे जैसे हैं बेहद ‘जेन्युइन’ हैं। जब वे पास आते हैं, तो डर पिघल जाता है। लड़कियां और बच्चे उनकी एक हंसी पर अपना सब कुछ हार बैठते हैं। जहां दूसरे नेताओं के रौब से लड़कियां झिझकती हैं, सहम जाती हैं वहीं राहुल गांधी के पास आते ही एक अजीब सा सुकून, एक गहरा सा कम्फर्ट महसूस होता है।
निगाहों का लहजा, जो हर लड़की को अपना मुरीद बना ले
पीहू ने ढलती शाम की रोशनी में खोते हुए कहा कि राहुल गांधी की नजरों में औरतों के लिए जो इज्जत और नजाकत है, वही उन्हें दूसरों से जुदा बनाती है। वे सिर्फ बातें नहीं करते, वे महफूज होने का अहसास दिलाते हैं। वे जब बेटियों की आजादी, उनकी तरक्की और उनकी हिफाजत की बात करते हैं, तो वो बातें सीधे दिल में उतर जाती हैं। किस्से तो बहुत सुने थे ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ के नारों के, पर पीहू कहती हैं कि उन खोखले वादों में वो गर्माहट कहां? राहुल के लफ्जों में जो सच्चाई है, जो अपनेपन की खुशबू है, वो किसी और में नहीं।
यह पीहू का पहला सियासी सफर था
पहली मुलाकात, पहला एहसास यह पीहू का पहला सियासी सफर था, पर किसी के खिंचाव में वो अपनी तमाम बंदिशें तोड़कर इंदौर चली आईं। उनकी बातों में सिर्फ किसी नेता का समर्थन नहीं था, बल्कि एक ऐसी दीवानगी और आकर्षण था, जो किसी को पहली नजर में देखकर दिल की गहराइयों में उतर जाता है। अब जब ‘छात्रों की गूंज’ का मंच सज चुका है, निगाहें सिर्फ उस मोड़ पर टिकी हैं जहां से राहुल गांधी गुजरेंगे। देखना होगा कि जब यह ‘युवाओं का चहेता दिल’ मंच पर आएगा, तो इंदौर की धड़कनें किस कदर बेकाबू होती हैं।